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-संजय किशोर
कुछ खिलाड़ी समय के साथ बदलते हैं. कुछ समय को अपने हिसाब से बदल देते हैं.
विराट कोहली इन दिनों वनडे क्रिकेट में वही कर रहे हैं, जो उन्होंने एक दशक पहले किया था.
ऐसा लग रहा है जैसे 2016 की घड़ी फिर से चल पड़ी हो, जब कोहली सिर्फ़ रन नहीं बनाते थे, बल्कि विरोधी टीमों की योजना, धैर्य और आत्मविश्वास तीनों को तोड़ देते थे.
हालिया सात वनडे पारियों में छह बार पचास से अधिक का स्कोर इस बात का सबूत है कि यह कोई क्षणिक लय नहीं, बल्कि निरंतरता की वापसी है.
दक्षिण अफ्रीका के ख़िलाफ़ 135 और 102 रनों की पारियां, न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ़ वडोदरा में 93 और फिर इंदौर में 124 रन का यह शतक.
ये सिर्फ़ शानदार फॉर्म का संकेत नहीं, बल्कि एक बल्लेबाज़ के दोबारा ख़ुद से मिलने की कहानी है. जहाँ रोहित शर्मा शुरुआत को बड़े स्कोर में नहीं बदल पा रहे, वहीं कोहली मैच को गहराई तक लेकर जा रहे हैं.
इंदौर में भारत मैच हार गया. सिरीज़ भी हाथ से निकल गई. न्यूज़ीलैंड ने 37 वर्षों में पहली बार भारत में वनडे सिरीज़ जीतकर इतिहास रच दिया.
लेकिन रविवार की शाम की कहानी, हमेशा की तरह, स्कोरबोर्ड से कहीं आगे जाकर एक ही व्यक्ति के इर्द-गिर्द सिमट गई.
जब तक विराट कोहली क्रीज़ पर थे, मुकाबला ज़िंदा था. लक्ष्य भले ही बड़ा हो, विकेट भले ही गिरते जा रहे हों, लेकिन मैच तब तक खुला हुआ था.
जैसे ही वह आउट हुए, उसके महज़ दो गेंद बाद मैच भी समाप्त हो गया.
यह महज़ संयोग नहीं था. यह विराट कोहली का क्रिकेट है, जहाँ उनकी मौजूदगी ही उम्मीद की सबसे मज़बूत बुनियाद बन जाती है.
कोहली के इस शतक ने करोड़ों दिल जीते, क्योंकि यह सिर्फ रनों का अंबार नहीं, बल्कि एक अकेले योद्धा का संघर्ष था.
जब रोहित, गिल और मध्यक्रम ताश के पत्तों की तरह बिखर गया, तब कोहली ने एक छोर थामे रखा. विराट की इस पारी में कोई जल्दबाज़ी नहीं थी.
शुरुआत में आक्रामक संकेत ज़रूर मिले. एक पुल शॉट पर छक्का और शानदार कवर ड्राइव. लेकिन उसके बाद पारी ठहर गई. 52 गेंदों पर अर्धशतक लगाया. तब तक उन्होंने सिर्फ एक छक्का लगाया. टी-20 युग में यह असामान्य लग सकता है, लेकिन कोहली जानते थे कि गिरते विकेटों के बीच टीम उनसे क्या मांग रही है.
40वें ओवर के आसपास कोहली ने गियर बदला. विशेषज्ञ इसे 'विराट 2.0' कह रहे हैं.
11 गेंदों में दो चौके और एक छक्का लगाकर उन्होंने न्यूज़ीलैंड के गेंदबाजों पर दबाव वापस डाल दिया. जेडेन लेनोक्स जैसे स्पिनर्स के ख़िलाफ़ कदमों का इस्तेमाल और कलाइयों के जादू ने दर्शकों को उनके 2016 के प्राइम फॉर्म की याद दिला दी.
कोहली ने अपनी बल्लेबाजी शैली को पूरी तरह 'अपग्रेड' किया है. पहले वे पारी बुनते थे, लेकिन अब वे पहली 20 गेंदों के भीतर ही छक्के जड़कर 'काउंटर-अटैक' कर रहे हैं.
यहां भी वे काफी आक्रामक नजर आ रहे थे और तेज गेंदबाजों पर प्रहार करने के लिए उतावले दिखे. उन्होंने ज़रूरत पड़ने पर हवा में शॉट खेलने से भी परहेज नहीं किया और अपनी पहली 24 गेंदों में ही चार चौके और एक छक्का जड़ दिया. विशेषज्ञों का कहना है कि अब वे 'गैप' खोजने के बजाय बाउंड्री क्लियर करने पर ध्यान दे रहे हैं, जिसके कारण उनका स्ट्राइक रेट अब 115-120 के करीब पहुँच गया है.
कोहली ने 91 गेंदों में अपना शतक पूरा किया. सोशल मीडिया से लेकर कमेंट्री बॉक्स तक, लोगों ने यही कहा कि 'किंग अभी भी ज़िंदा है.'
प्रशंसकों का मानना है कि कोहली की तकनीक में अब 2026 की आधुनिकता और पुराने अनुभव का बेजोड़ संगम है.
54वां वनडे शतक
रनों का पीछा करते हुए विराट कोहली का रिकॉर्ड किसी महागाथा जैसा है. यह उनके करियर का 54वां वनडे शतक था और लक्ष्य का पीछा करते हुए 29वां.
'चेज़ मास्टर' की साख इसी बात से समझी जा सकती है कि जब दबाव चरम पर होता है, विराट की एकाग्रता और बढ़ जाती है.
हालांकि, उनका 124 रन (108 गेंद) का योगदान बेकार गया, लेकिन इसने उन्हें सचिन तेंदुलकर के 100 अंतरराष्ट्रीय शतकों के रिकॉर्ड के और करीब पहुँचा दिया है.
अब वे सचिन से मात्र 15 शतक दूर हैं. सचिन 100 शतकों के साथ पहले, कोहली 85 शतकों के साथ दूसरे और रिकी पोंटिंग 71 शतकों के साथ तीसरे स्थान पर हैं.
वर्तमान में विराट कोहली आईसीसी वनडे रैंकिंग में नंबर एक (785 अंक) पर पहुंच गए हैं. पिछले सात मैचों में उन्होंने 616 रन बनाए हैं.
इसके विपरीत, तीसरे नंबर पर चल रहे रोहित शर्मा (775 अंक) अच्छी शुरुआत को बड़े स्कोर में तब्दील करने में संघर्ष कर रहे हैं. न्यूज़ीलैंड के खिलाफ इस सिरीज़ में रोहित का संघर्ष (26, 24, 11) साफ़ दिखा, जबकि कोहली ने 93, 23 और 124 की पारियों से अपनी उपयोगिता साबित की. रोहित का यह 100वां वनडे मैच था.
बनाया एक और रिकॉर्ड
अपनी 124 रनों की पारी के दौरान विराट कोहली वनडे क्रिकेट के इतिहास में नंबर 3 पर सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज बन गए. उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के दिग्गज कप्तान रिकी पोंटिंग को पीछे छोड़ा है.
पोंटिंग के नाम नंबर 3 पर 330 पारियों में 12,662 रन थे. विराट के खाते में नंबर तीन पर बल्लेबाजी करते हुए 244 मैच में 12,676 रन दर्ज हो गए हैं.
मैच के बाद भारतीय कप्तान शुभमन गिल ने कहा, "विराट जिस तरह से बल्लेबाज़ी कर रहे हैं, वह हमेशा (टीम के लिए) एक प्लस पॉइंट होता है."
जिस तरह की फिटनेस और भूख कोहली आज दिखा रहे हैं, उसे देखते हुए 2027 के वर्ल्ड कप में उनकी भागीदारी पर कोई संदेह नहीं दिखता.
उन्होंने टी-20 से संन्यास लेकर अपने कार्यभार को बखूबी संभाला है. हालाँकि टेस्ट क्रिकेट में उनकी गैरमौजूदगी और फॉर्म की कमी अब भी प्रशंसकों को खलती है, लेकिन सफेद गेंद के क्रिकेट में उनकी 'फियरलेस' फॉर्म ने यह साफ कर दिया है कि अगला वर्ल्ड कप उनके करियर का सबसे शानदार विदाई गीत हो सकता है.
इंदौर की शाम ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया कि विराट कोहली का क्रिकेट अब केवल आंकड़ों की दौड़ नहीं है. वह एक मानसिकता है, एक आश्वासन है.
एक ऐसा नाम, जो मुश्किल हालात में टीम को याद आता है, चाहे नतीजा कुछ भी हो.
जब लक्ष्य बड़ा हो और रास्ता कठिन, भारतीय क्रिकेट आज भी उसी भरोसे की तलाश करता है और वह भरोसा अब भी विराट कोहली के बल्ले में बसता है. (bbc.com/hindi)


