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पति को 19 साल पुराने दहेज मृत्यु मामले में राहत, हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट की सजा रद्द की
19-Jan-2026 12:15 PM
पति को 19 साल पुराने दहेज मृत्यु मामले में राहत, हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट की सजा रद्द की

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

बिलासपुर, 19 जनवरी। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने दहेज मृत्यु के 19 साल पुराने एक मामले में पति को बरी कर दिया है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि अभियोजन पक्ष दहेज की मांग और मृत्यु से ठीक पहले क्रूरता को ठोस साक्ष्यों के साथ साबित करने में विफल रहा।

मामला बालोदाबाजार निवासी उदय भारती से जुड़ा है, जिसकी पत्नी सीमा की 6 नवंबर 2006 को फांसी लगाने से मौत हो गई थी। इस प्रकरण में वर्ष 2007 में ट्रायल कोर्ट ने उदय भारती को धारा 304-बी (दहेज मृत्यु) के तहत 7 साल और धारा 498-ए (दहेज प्रताड़ना) के तहत 3 साल की सजा सुनाई थी। सजा के खिलाफ भारती ने हाईकोर्ट में अपील दायर की थी।

अपील पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति रजनी दुबे की एकलपीठ ने रिकॉर्ड में मौजूद साक्ष्यों का विस्तार से परीक्षण किया। कोर्ट ने माना कि मृतका की मौत आत्महत्या थी, न कि हत्या। साथ ही यह भी कहा गया कि दहेज की मांग और मौत से ठीक पहले प्रताड़ना के आरोप सामान्य, विरोधाभासी और अप्रमाणित हैं।

कोर्ट ने विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया कि मौत से ठीक पहले दहेज के लिए क्रूरता का कोई विश्वसनीय सबूत प्रस्तुत नहीं किया गया। इसके अलावा, मृतका के माता-पिता और अन्य परिजनों द्वारा कथित प्रताड़ना के बावजूद कभी पुलिस में शिकायत दर्ज नहीं कराई गई, न ही दोनों परिवारों के बीच किसी तरह की बैठक या मध्यस्थता हुई।

मकान मालकिन, जो मामले में स्वतंत्र गवाह थीं, ने अदालत में बयान दिया कि पति-पत्नी सामान्य रूप से साथ रह रहे थे। शराब पीने की बात सामने आई, लेकिन कोर्ट ने इसे दहेज प्रताड़ना की श्रेणी में नहीं माना।

हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के हालिया निर्णयों का उल्लेख करते हुए कहा कि केवल सामान्य आरोपों के आधार पर दहेज मृत्यु का दोष सिद्ध नहीं किया जा सकता, जब तक कि कानून की अनिवार्य शर्तें पूरी न हों। इन तथ्यों के आधार पर हाईकोर्ट ने अपील स्वीकार करते हुए ट्रायल कोर्ट के फैसले को रद्द कर दिया और पति को दोषमुक्त करार दिया।


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