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अवैध संबंध नैतिक रूप से गलत, पर आत्महत्या के लिए उकसावा नहीं
06-Jan-2026 1:27 PM
अवैध संबंध नैतिक रूप से गलत, पर आत्महत्या के लिए उकसावा नहीं


हाई कोर्ट ने पति को बरी करने के खिलाफ अपील खारिज की
'छत्तीसगढ़' संवाददाता
बिलासपुर, 6 जनवरी।
 पति के कथित अवैध संबंध से परेशान होकर पत्नी की आत्महत्या के एक मामले में छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने कहा है कि अवैध संबंध नैतिक रूप से गलत हो सकते हैं, लेकिन जब तक आत्महत्या से उनका सीधा और स्पष्ट संबंध साबित न हो, तब तक आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरण (धारा 306 आईपीसी ) का अपराध नहीं बनता। इस आधार पर हाई कोर्ट ने सत्र न्यायालय के दोषमुक्ति आदेश को बरकरार रखते हुए अपील खारिज कर दी।

महासमुंद की महिला कुंती की शादी वर्ष 2011 में रवि कुमार गायकवाड से हुई थी। आरोप था कि संतान न होने, कम दहेज और अशिक्षित होने के कारण उसे प्रताड़ित किया जाता था। साथ ही पति के एक महिला मित्र से कथित अवैध संबंध होने की बात भी सामने आई। 4 जून 2017 को कुंती की मृत्यु के बाद पति और उसकी महिला मित्र के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का अपराध दर्ज किया गया।

सत्र परीक्षण के दौरान अभियोजन पक्ष प्रताड़ना या आत्महत्या के लिए उकसावे से जुड़े ठोस और प्रत्यक्ष प्रमाण प्रस्तुत नहीं कर सका। इसके चलते 22 जुलाई 2022 को सत्र न्यायालय ने पति और महिला मित्र को दोषमुक्त कर दिया।

दोषमुक्ति के खिलाफ पीड़ित पक्ष ने हाई कोर्ट में अपील दायर की। मामले की सुनवाई संजय श्याम अग्रवाल की सिंगल बेंच में हुई।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि धारा 306 आईपीसी के तहत सजा के लिए प्रत्यक्ष उकसावा, गंभीर मानसिक क्रूरता और ठोस साक्ष्य आवश्यक हैं। केवल अवैध संबंध होने से आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरण सिद्ध नहीं होता।

हाई कोर्ट के समक्ष मृतक महिला का डायरी नोट प्रस्तुत किया गया था। अदालत ने कहा कि नोट से यह संकेत मिलता है कि मृतका पति से प्रेम करती थी और महिला मित्र से नाराज थी, लेकिन कहीं भी प्रत्यक्ष उकसावे या गंभीर प्रताड़ना का उल्लेख नहीं है।
अदालत ने दोहराया कि नैतिक गलतियां कानूनन अपराध तभी बनती हैं, जब उनका सीधा और प्रमाणित संबंध जुड़ा हो।


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