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'छत्तीसगढ़' संवाददाता
बिलासपुर, 6 जनवरी। छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान, बिलासपुर (सिम्स) में नववर्ष पर एक उन्नत चिकित्सा सुविधा मिली। अत्याधुनिक सी-आर्म मशीन से पहला जटिल ऑपरेशन सफलतापूर्वक किया गया, जिससे अब गंभीर हड्डी रोग और सड़क दुर्घटना के मरीजों को निजी अस्पतालों या रायपुर रेफर नहीं किया जाएगा।
करीब सात वर्षों से सिम्स में सी-आर्ममशीन उपलब्ध नहीं होने के कारण हर साल 100 से 150 गंभीर ट्रॉमा और ऑर्थोपेडिक मरीजों को बाहर भेजना पड़ता था। नई मशीन की स्थापना के बाद यह बाधा समाप्त हो गई है और उन्नत शल्यक्रियाएं सिम्स में ही संभव हो सकी हैं।
सी-आर्म मशीन से पहला जटिल ऑपरेशन सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल खेदु दास (40 वर्ष), निवासी देवरीडीह, जिला बिलासपुर पर किया गया। 27 दिसंबर 2025 को दुर्गा मंदिर, व्यापार विहार के पास उनकी मोटरसाइकिल की ऑटो से टक्कर हो गई थी। हादसे में दाहिने पैर की हड्डी बाहर निकल आई थी, जो अत्यंत गंभीर स्थिति थी।
ऑर्थोपेडिक विभाग की टीम ने तत्काल प्राथमिक उपचार कर हड्डी को सही स्थान पर स्थापित किया और बाहरी रॉड से पैर को फिक्स किया, ताकि संक्रमण का खतरा कम हो सके।
घाव भरने के बाद 5 जनवरी 2026 को सी-आर्ममशीन की सहायता से मरीज के पैर में टिबिया नेलिंग की जटिल सर्जरी की गई। इस तकनीक से ऑपरेशन के दौरान हड्डी की वास्तविक स्थिति स्क्रीन पर स्पष्ट दिखाई देती रही, जिससे सर्जरी अधिक सुरक्षित, सटीक और प्रभावी साबित हुई।
इस सफल ऑपरेशन में ऑर्थोपेडिक विभाग से ए. आर. बैन, संजय घिल्ले, अविनाश अग्रवाल और प्रवीण द्विवेदी की अहम भूमिका रही। एनेस्थीसिया विभाग से विभागाध्यक्ष मधुमिता मूर्ति, भावना राय एवं बर्मन ने सर्जरी के दौरान कुशल एनेस्थीसिया प्रबंधन और निरंतर निगरानी सुनिश्चित की।
सिम्स अधिष्ठाता रमणेश मूर्ति ने कहा कि नववर्ष पर प्राप्त सी-आर्म मशीन संस्थान के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि है, जिससे अब जटिल हड्डी रोग और ट्रॉमा मामलों का उच्चस्तरीय इलाज सिम्स में ही संभव हो गया है। चिकित्सा अधीक्षक लखन सिंह ने बताया कि सी-आर्म तकनीक से सर्जरी की सफलता दर बढ़ी है और मरीजों की रिकवरी तेज हुई है।


