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सिंगल यूज प्लास्टिक : ढाई साल बाद पर्यावरण संरक्षण मंडल ने प्रतिबंधित करने लिखा
18-Dec-2025 4:36 PM
सिंगल यूज प्लास्टिक : ढाई साल बाद पर्यावरण संरक्षण मंडल ने प्रतिबंधित करने लिखा

लागू प्रतिबंध कागजों में रहे, कैटरिंग मटेरियल के निर्माण की अनुमति मिलती रही

रायपुर, 18 दिसंबर। यह एक ऐसा मामला है जिसमें सरकार ने ढाई साल पहले सभी प्रकार के सिंगल यूज प्लास्टिक पर प्रतिबंध लगाने के लिए नियम बना दिए थे। मगर अब जाकर पर्यावरण संरक्षण मंडल ने नगरीय प्रशासन संचालक को पत्र लिखकर सिंगल यूज प्लास्टिक के उपयोग, विक्रय, परिवहन, संग्रहण और आयात पर रोक लगाने के लिए विधिवत पत्र जारी किया है। दिलचस्प बात ये है कि सभी प्रतिबंधित सामग्री बाजार में बिक, और उपयोग में आ रही है। इस पूरे मामले पर आरटीआई कार्यकर्ता नितिन सिंघवी ने नियमों के पालन में देरी पर सवाल उठाए हैं।

आवास और पर्यावरण विभाग ने जून 2023 में, नए नियम (छत्तीसगढ़ प्लास्टिक एंव अन्य नॉन-बायोडिग्रेडेबल मटेरियल 6रेगुलेशन ऑफ़ यूज़ एंड डिस्पोजल8 नियम, 2023) लाये, जिसके द्वारा छत्तीसगढ़ में सभी प्रकार के सिंगल यूज़ प्लास्टिक पर प्रतिबंध लगा दिया गया। परंतु इन प्रतिबंध को, छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल ने स्पष्ट रूप से, नगरीय प्रशासन और विकास विभाग की जानकारी में, ढाई साल बाद 3 दिसंबर 2025 को लाया। इस बीच सभी प्रतिबंधित सामग्री बाजार में बिक और उपयोग में आ रही है।

क्या-क्या है प्रतिबंधित

(1)        प्लास्टिक और नॉन वूवन पॉलिप्रोपिलीन बैग (हैंडल सहित या बिना हैंडल के) (2) प्लास्टिक और थर्मोकोल से बने डिस्पोजेबल कप, प्लेट, कटोरा, ग्लास, कांटे, चम्मच, स्ट्रा (3) खाद पैकेजिंग के लिए उपयोग किए जाने वाले तरल पदार्थ रखने वाले डिस्पोजल कप और डिस्पोजेबल पाउच, खाद और अनाज की प्लास्टिक पैकेजिंग (50 माइक्रोन से कम मोटाई वाले-सशर्त) (4) उत्पादों को लपेटने और संग्रहण हेतु की जाने वाली (5) प्लास्टिक और थर्मोकोल से बने साज-सज्जा के समान, फ्लैग (6) गुटखा तंबाकू पान मसाला के लिए प्लास्टिक सेचे (7) शॉर्ट लाइफ पीवीसी, क्लोरीनयुक्त प्लास्टिक से बनी विज्ञापन सामग्री जैसे फ्लेक्स, बैनर, होर्डिंग, फोम बोर्ड (8) 200 मिलीमीटर से कम क्षमता वाली पेयजल बोतले (9) गैर पुनर्चक्रनी मल्टीलेयर प्लास्टिक की पैकेजिंग।

जानकारी देते हुए रायपुर निवासी श्री सिंघवी ने बताया कि उनकी एक जनहित याचिका के दौरान वर्ष 2017 में सबसे पहले सिंगल यूज़ प्लास्टिक पर व्यापक प्रतिबंध लगाया गया। परंतु पर्यावरण संरक्षण मंडल उसके क्रियान्वयन में जागरूक नहीं रहा। यहां तक की प्रतिबंध के बावजूद प्लास्टिक के कैटरिंग मटेरियल के निर्माण की अनुमति का नवीनीकरण भी किया गया। नॉन वूवन कैरी बैग पर जनवरी 2020 में पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया, ये कैरी बैग कपड़े के समान दिखते हैं और पूरे प्रदेश में दुकानों में इनका व्यापक उपयोग होता है। परन्तु किसी विशेष लॉबी के दबाव के कारण 2022 में इस प्रकार के नॉन वूवन कैरी बैग के निर्माण, विक्रय इत्यादि पर यह कह कर छूट दी गई की 60 ग्राम प्रति वर्ग मीटर के समतुल्य या उससे अधिक के नॉन वूवन कैरी बैग बनाए जा सकते हैं। परंतु उनके वजन का नाप कभी नहीं किया गया। मई 2023 की अधिसूचना में इन्हें पुन: पूर्णत प्रतिबंधित कर दिया परंतु पिछले ढाई वर्ष में इनका उपयोग व्यापक रूप से हो रहा है। इसी प्रकार जो विज्ञापन सामग्री उपयोग में लाई जा रही है उसकी जांच भी नहीं की गई जब कि सभी जांच सिविल सोसायटी के सदस्यों के समक्ष होनी चाहिए।

...ये आ कहाँ से रही हैं?

सिंघवी ने जवाबदेह अधिकारियों से पूछा है कि जब सिंगल यूज प्लास्टिक के सभी उत्पादों के निर्माण, उपयोग, परिवहन, वितरण, थोक और खुदरा बिक्री, भंडारण और आयात पर पूर्ण प्रतिबंध है तो यह छत्तीसगढ़ में कहां से आ रही है? सिंघवी ने बताया कि अधिकारियों से पूछने पर रहते हैं कि जागरूकता फैला रहे हैं, कोई विकल्प निकलेगा तो सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग अपने आप बंद हो जाएगा। सिंघवी ने कहा की पिछले 30 वर्षों में कोई विकल्प नहीं निकाल पाए और अधिकारी असफल जागरूकता बढ़ाते रहे हैं परंतु प्रतिबंध को क्यों नहीं लागू करवा पा रहे हैं? इसका खुलासा होना चाहिए। सिंघवी ने आशंका व्यक्त की कि अधिसूचना के प्रचार-प्रसार और कार्यवाही से विशेष लाबी अधिसूचना में संशोधन करवाने का दबाव पैदा कर सकती है परन्तु अधिकारियों ओर नेताओं को व्यापक जनहित और आने वाली पीढियों के हितों के आगे दबना नहीं चाहिए।

 

आने वाली पीढिय़ां माफ नहीं करेंगी जब उनका डीएनए क्षतिग्रस्त होने लगेगा

प्लास्टिक उपभोग में भारत विश्व के शीर्ष देशों में तीसरे स्थान में आता है, लेकिन प्लास्टिक प्रदूषण के मामले में भारत विश्व में पहले स्थान पर है। आज प्लास्टिक और माइक्रोप्लास्टिक पृथ्वी की सबसे की सबसे गहरी जगह चैलेंजर डीप, से लेकर हिमालय में माउंट एवरेस्ट के पास की ऊँचाई तक पहुचं चुका है। यह पर्यावरणीय समस्या ही नहीं, एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट है। प्लास्टिक कचरा नालियाँ जाम करता है, जिससे जलभराव होता है- यह मच्छरों के प्रजनन के लिए अनुकूल स्थिति बनाता है, जलवायु परिवर्तन में लम्बे दिनों का बढ़ा तापमान-आद्रता इस समस्या को बढ़ा रहे हैं।

माइक्रोप्लास्टिक अब मिट्टी, जल और भोजन श्रृंखला में प्रवेश कर चुका है और मछलियों, पक्षियों तथा स्थलीय जीवों को प्रभावित कर रहा है। वैज्ञानिक अध्ययनों में यह सिद्ध हो चुका है कि माइक्रोप्लास्टिक मानव शरीर के फंेफड़ों, रक्त, मस्तिष्क, वृषण तथा गर्भ में पल रहे भ्रूण, महिला के स्तन दूध तक में पाया गया है। यह पानी, भोजन और हवा के माध्यम से शरीर में पहुँचता है। प्लास्टिक से जुड़े रसायन हार्मोन असंतुलन, प्रजनन समस्याएँ और कैंसर का खतरा बढ़ाते हैं। माइक्रोप्लास्टिक कोशिकीय स्तर पर डीएनए को क्षति पहुँचा सकता है।

प्लास्टिक एक धीमा जहर है, और यदि इसके प्रतिबंधों का सख्ती से पालन नहीं हुआ तो आने वाली पीढिय़ाँ इस लापरवाही को कभी माफ नहीं करेंगी।

 


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