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‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायपुर, 17 दिसंबर। प्रदेश के पुलिसकर्मियों के वेतन-भत्ता पुनरीक्षण के लिए गठित कमेटी ने अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है। कमेटी ने अलग-अलग भत्तों की जगह विशेष पुलिस रिस्पांस एलाउंसेस के रूप में आरक्षक से टीआई स्तर के पुलिसकर्मियों को प्रतिमाह 5 हजार रूपए देने की सिफारिश की है। यह जानकारी गृहमंत्री विजय शर्मा ने एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।
कांग्रेस सदस्य चातुरीनंद के सवाल के जवाब में गृहमंत्री ने बताया कि पुलिस वेतन-भत्ता कमेटी का गठन किया गया है। कमेटी के अध्यक्ष एडीजी एसआरपी कल्लुरी हैं। कमेटी में डीआईजी अरविंद कुजूर, मनीष शर्मा, वित्त नियंत्रक शंकर झा, एआईजी रोहित झा, और अंशुमन सिसोदिया सदस्य हैं। कमेटी ने वेतन-भत्तों की समीक्षा कर 5 बैठकें की, और अन्य राज्यों में प्रचलित भत्तों का अध्ययन किया, साथ ही विभिन्न संगठनों से प्राप्त आवेदनों पर भी चर्चा की।
कमेटी ने छत्तीसगढ़ पुलिस की कार्य प्रकृति और अन्य राज्यों में प्रचलित भत्तों का तुलनात्मक अध्ययन कर भत्तों की वर्तमान समय में प्रासंगिकता के अनुक्रम में मुद्रा विनिमय दरों का सूक्ष्म पुनरीक्षण किया गया। साथ ही अनुशंसा सरकार को दी है।
कमेटी ने पौष्टिक आहार भत्ता सौ रूपए से बढ़ाकर एक हजार रूपए, वर्दी धुलाई भत्ता 60 से बढ़ाकर 5 सौ रूपए, और रायफल भत्ता दो सौ और तीन सौ की जगह एक हजार रूपए देने की अनुसंशा की गई है। इसके अलावा राशन भत्ता दो हजार रूपए, एसपीएफ के लिए 22 सौ, निश्चित यात्रा भत्ता 75 और 100 रूपए से बढ़ाकर एक हजार, वाहन भत्ता सौ रूपए से बढ़ाकर 15 सौ रूपए, वर्दी भत्ता 8 सौ से बढ़ाकर प्रत्येक तीन वर्ष के लिए 4 हजार रूपए करने का सुझाव दिया है।
कमेटी ने यह भी विकल्प सुझाया है कि राशन भत्ता, और वर्दी भत्ता को छोडक़र बाकी भत्ता को समाप्त किया जा सकता है, और विशेष पुलिस रिस्पांस एलाउंसेस के रूप में 5 हजार रूपए प्रतिमाह की दर से अराजपत्रित पुलिसकर्मियों को (आरक्षक से निरीक्षक स्तर तक के समस्त संवर्ग के पुलिसकर्मी) को भुगतान किए जाने की अनुशंसा की है। कमेटी की रिपोर्ट पर सरकार ने अभी कोई फैसला नहीं लिया है।


