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एआई से बनाई फर्जी टिकट, एक ही बर्थ पर दो मुसाफिरों ने किया दावा
16-Dec-2025 1:15 PM
एआई से बनाई फर्जी टिकट, एक ही बर्थ पर दो मुसाफिरों ने किया दावा

रेलवे ने सभी संदिग्ध ई टिकटों की एचएचटी जांच करने का सर्कुलर जारी किया

छत्तीसगढ़' संवाददाता 

बिलासपुर, 16 दिसंबर। रेलवे में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के दुरुपयोग से फर्जी ई-टिकट बनने लगे हैं। ऐसा ही एक मामला 12 दिसंबर  को गाड़ी संख्या 12833 में नागपुर–गोंदिया सेक्शन के दौरान उजागर हुआ, जहां एक ही सीट पर दो यात्रियों ने दावा किया।

ड्यूटी पर तैनात टिकट जांच कर्मचारी टीटीई इंद्रजीत को संदेह होने पर दोनों यात्रियों के ई-टिकटों की एचएचटी  मशीन से जांच की गई। जांच में एक टिकट वैध पाया गया, जबकि दूसरा टिकट निष्क्रिय पीएनआर के आधार पर तैयार किया गया फर्जी ई-टिकट निकला। पूछताछ में यात्रियों ने बताया कि यह टिकट उन्हें एक अज्ञात व्यक्ति ने दिया था, जिसका मोबाइल नंबर बाद में बंद मिला।
जांच में पता चला कि फ्लश्ड पीएनआर के आधार पर ई-टिकट की पीडीएफ फाइल को डिजिटल रूप से एडिट किया गया था और एआई टूल्स का इस्तेमाल कर नकली टिकट तैयार किया गया। इससे रेलवे में टिकट फर्जीवाड़े का नया और खतरनाक तरीका सामने आया है।
इसी तरह का एक मामला हाल ही में जयपुर मंडल में भी सामने आया था। कुछ विद्यार्थियों ने एक व्यक्ति के वैध ई-टिकट को एआई की मदद से एडिट कर सात यात्रियों का टिकट दिखाया। यह फर्जीवाड़ा तब पकड़ा गया, जब हेड टीसी ने मोबाइल पर दिखाए गए टिकट की गहन जांच की।
इन मामलों की गंभीरता को देखते हुए रेलवे प्रशासन ने सभी टिकट जांच कर्मचारियों को निर्देश दिया है कि वे हर ई-टिकट और एम-टिकट का एचएचटी से अनिवार्य सत्यापन करें।

मालूम हो कि रेलवे में एचएचटी जांच का मतलब हैंड हेल्ड टर्मिनल से टिकट की डिजिटल जांच करना होता है। यह एक पोर्टेबल इलेक्ट्रॉनिक मशीन होती है, जो टिकट जांच कर्मचारियों के पास रहती है। जब कोई यात्री ई-टिकट या मोबाइल टिकट दिखाता है, तो टीटीई उसमें दिए गए पीएनआर, कोच, सीट नंबर, यात्रा तिथि और यात्री नाम को एचएचटी में जांचता है। यह मशीन सीधे रेलवे के केंद्रीय सर्वर से जुड़ी होती है, इसलिए कुछ ही सेकंड में पता चल जाता है कि टिकट असली है या फर्जी। एचएचटी जांच फर्जी टिकट पकड़ने का सबसे भरोसेमंद तरीका मानी जाती है।

रेलवे के वाणिज्य विभाग ने सभी टीटीई को निर्देश दिया है कि किसी भी संदिग्ध या संशोधित डिजिटल टिकट को तुरंत फर्जी मानते हुए आवश्यक कानूनी कार्रवाई करे। ऐसे मामलों की जानकारी तुरंत संबंधित जीआरपी या आरपीएफ को देने के निर्देश दिए हैं। साथ ही यात्रियों से अपील की गई है कि वे केवल अधिकृत माध्यमों से ही टिकट खरीदें, अनजान या अनधिकृत व्यक्तियों से टिकट न लें और किसी भी संदिग्ध स्थिति की सूचना तुरंत रेलवे कर्मियों को दें।

 

 


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