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केंद्रीय मंत्री शेखावत ने कहा- छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बिलासपुर, 16 दिसंबर। छत्तीसगढ़ की लोककला गेड़ी नृत्य ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी मजबूत पहचान दर्ज कराई है। जिले की सांस्कृतिक संस्था ‘लोक श्रृंगार भारती’ के गेड़ी लोक नृत्य दल ने यूनेस्को और संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के आमंत्रण पर नई दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किला प्रांगण में शानदार प्रस्तुति दी। 7 से 13 दिसंबर तक चले इस अंतरराष्ट्रीय समारोह में 180 देशों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी रही।
मुख्य गायक और नृत्य निर्देशक अनिल गढ़ेवाल के नेतृत्व में गेड़ी नर्तकों ने अपनी ऊर्जावान, साहसिक और रोमांचक प्रस्तुति से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। अंतरराष्ट्रीय दर्शकों ने तालियों की गूंज के साथ छत्तीसगढ़ की इस अनूठी लोककला का स्वागत किया।
कार्यक्रम में विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर, केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, विभिन्न राज्यों के कलाकारों के साथ 180 देशों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। समारोह का सबसे ऐतिहासिक क्षण तब आया जब भारत के महापर्व दीपावली को यूनेस्को द्वारा विश्व सांस्कृतिक धरोहर के रूप में मान्यता दी गई। इस उपलब्धि के अवसर पर छत्तीसगढ़ के गेड़ी नृत्य दल की प्रस्तुति को विशेष सराहना मिली।
केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत गेड़ी नृत्य की भावपूर्ण और साहसिक प्रस्तुति से खासे प्रभावित नजर आए। उन्होंने कलाकारों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा-छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया।
गढ़ेवाल द्वारा प्रस्तुत गीत काट ले हरियर बांस ने विदेशी प्रतिनिधियों में छत्तीसगढ़ी संस्कृति के प्रति गहरी जिज्ञासा जगा दी। मुख्य मांदल वादक मोहन डोंगरे ने एक ही स्थान पर घूमते हुए मांदल वादन कर दर्शकों को चकित कर दिया। हारमोनियम वादक सौखी लाल कोसले और बांसुरी वादक महेश नवरंग की स्वर लहरियों पर कई देशों के प्रतिनिधि झूम उठे। गेड़ी नर्तक प्रभात बंजारे, सूरज खांडे, शुभम भार्गव, लक्ष्मी नारायण माण्डले, फूलचंद ओगरे और मनोज माण्डले ने भी साहसिक करतब दिखाए। एक ही गेड़ी पर संतुलन बनाकर मानवीय संरचनाएं बनाते ही पूरा प्रांगण तालियों से गूंज उठा।
छत्तीसगढ़ की पारंपरिक वेशभूषा, कौड़ियों और चीनी मिट्टी की मालाएं, पटसन वस्त्र, सिकबंध और मयूर पंख धारण कर की गई प्रस्तुति ने गेड़ी नृत्य को और भी जीवंत बना दिया।
यूनेस्को के महानिदेशक डॉ. खालिद एन. एनानी सहित कई देशों के प्रतिनिधियों ने गेड़ी नृत्य दल के साथ स्मृति चित्र लिया और छत्तीसगढ़ को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सांस्कृतिक पहचान दिलाने के लिए दल को शुभकामनाएं दीं।


