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‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बिलासपुर, 16 दिसंबर। शहर के अलग-अलग इलाकों में आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित कर रही गंभीर समस्याओं पर छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस बिभू दत्ता गुरु की डिवीजन बेंच ने रास्ता बंद किए जाने, ध्वनि प्रदूषण और खुले में कचरा जलाने से जुड़ी शिकायतों पर स्वतः संज्ञान लेते हुए प्रशासनिक जवाबदेही तय करने के संकेत दिए हैं। कोर्ट ने कलेक्टर और नगर निगम आयुक्त से शपथपत्र मांगा है। इन मामलों की अगली सुनवाई 17 दिसंबर को होगी।
हाई कोर्ट ने शर्मा विहार और गीतांजलि सिटी को जोड़ने वाली सड़क को गर्डर लगाकर बंद किए जाने को गंभीर बताया है। कोर्ट ने कहा कि इससे न सिर्फ नागरिकों की आवाजाही प्रभावित हो रही है, बल्कि स्कूली बच्चों की पढ़ाई पर भी सीधा असर पड़ रहा है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, एक कॉलोनाइजर द्वारा रास्ता बंद कर देने से चारपहिया वाहनों की आवाजाही पूरी तरह ठप हो गई है। बच्चों को स्कूल जाने के लिए लंबा और असुविधाजनक रास्ता अपनाना पड़ रहा है। कोर्ट ने नगर निगम आयुक्त को इस मामले में व्यक्तिगत शपथपत्र पेश करने के निर्देश दिए हैं।
सरकंडा थाना क्षेत्र के ओम विहार में रातभर तेज आवाज में लाउडस्पीकर बजने की शिकायत को भी हाई कोर्ट ने गंभीरता से लिया है। रहवासियों का कहना है कि आधी रात से सुबह 8 बजे तक तेज शोर से उनकी नींद, स्वास्थ्य और दैनिक कामकाज प्रभावित हो रहा है।
लोगों ने बताया कि 112 पर कई बार शिकायत के बावजूद पुलिस मौके पर नहीं पहुंची। इस पर कोर्ट ने कलेक्टर से शपथपत्र मांगा है और स्पष्ट किया कि संविधान का अनुच्छेद 21 हर नागरिक को शांतिपूर्ण और गरिमापूर्ण वातावरण में जीने और सोने का मौलिक अधिकार देता है।
वार्ड नंबर 7 के कालिका नगर में खुले में कचरा जलाने की समस्या पर भी हाई कोर्ट ने संज्ञान लिया है। ग्रामीण बैंक के पास रोज सुबह-शाम कचरे में आग लगाए जाने से पूरे इलाके में धुआं फैल रहा है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, इससे घरों में बदबू भर जाती है और बच्चों व बुजुर्गों को सांस लेने में दिक्कत हो रही है। नगर निगम में कई बार शिकायत के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने पर कोर्ट ने कलेक्टर और निगम आयुक्त दोनों से जवाब तलब किया है। इन सभी मामलों पर सुनवाई 17 दिसंबर को होगी जिसमें प्रशासन को इन समस्याओं पर अपना पक्ष और उठाए गए कदमों की जानकारी देनी होगी।


