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बिलासपुर में न्यायिक अधोसंरचना को मिली नई मजबूती
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बिलासपुर, 16 दिसंबर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधिपति रमेश सिन्हा ने जिला एवं सत्र न्यायालय, बिलासपुर के एनेक्सी भवन में नवनिर्मित अतिरिक्त तल का लोकार्पण किया। इसी अवसर पर ई-मालखाना प्रणाली और जिले के पहले पेपरलेस न्यायालय का भी शुभारंभ हुआ।
कार्यक्रम के दौरान कुटुम्ब न्यायालय, बिलासपुर में बने अतिरिक्त भवन का वर्चुअल लोकार्पण किया गया। वहीं तखतपुर में नवीन सिविल न्यायालय भवन और न्यायिक अधिकारियों-कर्मचारियों के लिए प्रस्तावित आवासीय कॉलोनी का वर्चुअल भूमिपूजन एवं शिलान्यास भी हुआ।
चीफ जस्टिस सिन्हा ने अपने संबोधन में कहा कि न्याय की प्रभावी और व्यापक पहुंच के लिए सुदृढ़ न्यायिक अधोसंरचना अत्यंत आवश्यक है। न्यायपालिका की शक्ति इमारतों की भव्यता में नहीं, बल्कि उस विश्वास में है जो आमजन न्याय व्यवस्था पर करते हैं। उन्होंने कहा कि बदलते सामाजिक-आर्थिक परिवेश में न्याय को सुलभ, त्वरित और संवेदनशील बनाए रखना न्यायपालिका का दायित्व है।
मालूम हो कि ई-मालखाना प्रणाली से प्रकरणों में जब्त सामग्रियों का डिजिटल रिकॉर्ड, बेहतर निगरानी और सुव्यवस्थित प्रबंधन संभव होगा। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और समय की भी बचत होगी। वहीं पेपरलेस कोर्ट की शुरुआत से सूचना प्रौद्योगिकी का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित होगा, जिससे कार्यकुशलता बढ़ेगी, त्वरित न्याय मिलेगा और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।
कार्यक्रम में ब्रेल लिपि में मुद्रित पुस्तक का विमोचन भी किया गया। जस्टिस सिन्हा ने शासकीय ब्रेल प्रेस की प्रतिनिधि अन्नपूर्णा डोंगरे को यह पुस्तक प्रदान की। इसे दृष्टिबाधित व्यक्तियों के लिए न्यायिक जानकारी की समान पहुंच सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया गया।
जस्टिस सिन्हा ने कहा कि पर्याप्त न्यायालय भवन, आधुनिक सुविधाएं, वर्चुअल सुनवाई और डिजिटल रिकॉर्ड आज केवल सुविधा नहीं, बल्कि प्रभावी न्याय वितरण के आवश्यक उपकरण बन चुके हैं। राज्य के दूरस्थ जिलों और बाह्य न्यायालयों में भी न्यायिक अधोसंरचना को मजबूत करने के लिए लगातार सकारात्मक पहल की जा रही है।
समारोह में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के न्यायाधीश, रजिस्ट्रार जनरल, रजिस्ट्री अधिकारी, जिला प्रशासन, न्यायिक अधिकारी, अधिवक्ता, न्यायालयीन कर्मचारी और मीडिया प्रतिनिधि उपस्थित रहे। कार्यक्रम का उद्घाटन प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश के स्वागत भाषण से हुआ और समापन कुटुम्ब न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।


