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बारिश, तूफान व बिजली की भी जानकारी देगा
जहाजों की सुरक्षा में भी उपयोगी हो सकता है, रात और कोहरे में जहाजों को चट्टानों से बचा सकता है
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
महासमुंद,15 दिसंबर। नवाचार उम्र-संसाधन या सुविधा का मोहताज नहीं होता, बस जिज्ञासा, लगन और सही मार्गदर्शन चाहिए। महासमुंद जिले के 13 वर्षीय दुर्वांक नासरे ने इसे सच कर दिखाया है। उसकी वैज्ञानिक सोच ने ऐसा राडार सिस्टम विकसित किया है। जो वाहनों की तेज रफ्तार को पहचान सकता है, टक्कर से बचाव में सहायक है, जासूसी ड्रोन की निगरानी करता है और बारिश, तूफान व बिजली जैसी मौसमी परिस्थितियों की जानकारी देता है।
यही नहीं, यह सिस्टम हवाई जहाजों की स्थिति, ऊंचाई और दिशा का संकेत भी देता है। जो भविष्य में दुर्घटनाओं को रोकने में कारगर हो सकता है। दुर्वांक ने अपने घर में ही नवाचार का एक छोटा लेकिन प्रभावी प्रयोगशाला वातावरण तैयार कर लिया है। कंप्यूटर सिस्टम, प्रिंटर,सेंसर किट और सोल्डरिंग उपकरणों से सजी इस होम लैब में वह रोज नए प्रयोग करता है। इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को जोड़ता-तोड़ता है और सीख को व्यवहार में उतारता है।
वर्तमान में वह आर्डयूनो प्रोग्रामिंग सीख रहा है और हर सप्ताह अपनी नोटबुक में नए सवाल लिख उन्हें समझने की कोशिश करता है। यह सतत अभ्यास ही सबसे बड़ी ताकत है। चार साल पहले दुर्वांक अपनी मां मेघा नासरे के साथ आशीबाई गोलछा के सरकारी स्कूल में आयोजित अटल टिंकरिंग लैब की विज्ञान प्रदर्शनी देखने गया था। थ्री-डी प्रिंटर, टेलीस्कोप और आधुनिक प्रोजेक्ट मॉडलों ने उसे गहराई से प्रभावित किया। यहीं से नवाचार की चिंगारी जली। घर लौटकर उसने एटीएल सामग्री की मदद से वैक्यूम क्लीनर और पवन चक्की जैसे मॉडल बनाकर प्रयोग शुरू किए।
रडार आधारित यह नवाचार समुद्री जहाजों की सुरक्षा में भी उपयोगी हो सकता है। रात और कोहरे में जहाजों, चट्टानों व बाधाओं की पहचान कर दुर्घटनाएं घटा सकता है। घरों में लगे सीसीटीवी कैमरों में रडार मोशन सेंसर के रूप में इसका इस्तेमाल मानव गतिविधि की सूक्ष्म पहचान कर रात की सुरक्षा बढ़ा सकता है। कैमरों से जड़े रडार सिस्टम वाहन नंबर पढने में सहायक हो सकते हैं। दुर्वांक नॉन-एटीएल छात्र थे। आज वे एटीएल गतिविधियों में माहिर बन चुके हैं। उसका उत्साह व निरंतर प्रयास साबित करता है कि अवसर और मार्गदर्शन मिलते ही हर बच्चा नवाचार की राह पर आगे बढ़ सकता है।


