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ढाई हजार करोड़ से अधिक खर्च के बाद भी छत्तीसगढ़ की अधिकांश पंचायतें आज भी डिजिटल सेवाओं से वंचित
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
महासमुंद, 11 दिसंबर। लोकसभा के शीतकालीन सत्र में छत्तीसगढ़ से भाजपा सांसद रूप कुमारी चौधरी ने भारत नेट 2.0 परियोजना में हुए कथित भ्रष्टाचार और कुप्रबंधन पर तीखा हमला किया है।
ग्रामीण डिजिटल कनेक्टिविटी को मजबूत करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गई देश की सबसे विशाल डिजिटल परियोजनाओं में से एक भारत नेट 2.0 केंद्र सरकार की वह महत्वाकांक्षी योजना है जिसके माध्यम से देश के 2.5 लाख ग्राम पंचायतों और लाखों ग्रामीण घरों को तेज़ इंटरनेट, डिजिटल सेवाओं, ई-गवर्नेंस, टेलीमेडिसिन, ऑनलाइन शिक्षा, डिजिटल भुगतान और ग्रामीण आर्थिक गतिविधियों से जोड़ता है। केंद्र द्वारा राज्य को जारी किए गए लगभग 2.715 करोड़ से 2.635 करोड़ के खर्च के बावजूद अधिकांश पंचायतें आज भी डिजिटल सेवाओं से वंचित हैं। अधबिछा फाइबर, निष्क्रिय उपकरण, और कागज़ों में पूरा काम हो रहा है।
सांसद चौधरी ने सदन में प्रस्तुत किया कि छत्तीसगढ़ के कई जिलों में ऑप्टिकल फाइबर खुले में अधबिछा पड़ा मिला। कई जगहों पर खुदाई अधूरी छोड़ी गई और जहां कनेक्शन दिए गए, वहां उपकरण महीनों से निष्क्रिय पड़े हैं। डिजिटल क्लासरूम, पंचायत भवन, स्वास्थ्य केंद्र और सीएससी केंद्र सब इंटरनेट के अभाव में ठप पड़े हैं। देश में इस योजना पर अब तक 39.825 करोड़ से अधिक खर्च हो चुका है और संशोधित भारत नेट कार्यक्रम में 1,39.579 करोड़ का विशाल प्रावधान किया गया है। देशभर में 42 लाख रूट किमी फाइबर बिछाया जा चुका है। 2.18 लाख पंचायतों को सेवा-योग्य घोषित किया गया है। और 1.04 लाख से अधिक वाई-फ ाई हॉटस्पॉट स्थापित किए जा चुके हैं। लेकिन छत्तीसगढ़ में स्थिति बेहद भयावह है।
उन्होंने सदन को बताया कि यह स्थिति केवल लापरवाही नहीं, बल्कि सुनियोजित, सुनियंत्रित और संगठित भ्रष्टाचार का परिणाम है। जब स्वयं राज्य शासन कार्यान्वयन एजेंसी हो और फिर भी मानकों की अनदेखी करते हुए भुगतान कर दे, तो यह नीति-निर्माण पर सीधा हमला है।
सांसद चौधरी ने आरोप लगाया कि छत्तीसगढ़ में पूर्व कांग्रेस सरकार ने इस महत्वपूर्ण राष्ट्रीय परियोजना को कमीशनखोरी, ठेकेदारी खेल और तकनीकी धांधली की भेंट चढ़ा दी। राज्य सरकार द्वारा नियुक्त एजेंसियों ने काम को न केवल अधूरा छोड़ा, बल्कि कई स्थानों पर कोई काम हुआ ही नहीं, फिर भी भुगतान जारी रहा।
उन्होंने मांग की कि पूर्व कांग्रेस सरकार द्वारा नियुक्त सभी ठेकेदारों और एजेंसियों की पूरी सूची सार्वजनिक की जाए। परियोजना की स्वतंत्र तकनीकी और वित्तीय ऑडिट कराई जाए और दोषी अधिकारियों, इंजीनियरों और एजेंसियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए।
सांसद चौधरी ने कहा कि इस भ्रष्टाचार का सबसे बड़ा बोझ ग्रामीण जनता उठा रही है। छात्राएं ऑनलाइन शिक्षा से वंचित उपस्वास्थ्य केंद्रों में डिजिटल स्वास्थ्य सेवाएं ठप हैं। पंचायत कार्य बाधित हैं। किसानों को डिजिटल सेवाएं नहीं मिल रहीं और महिलाओं के लिए ऑनलाइन प्रशिक्षण एवं स्वरोजगार योजनाएं प्रभावित हुई हंै।
इस तरह राष्ट्रीय बहस की शुरुआत सांसद रूप कुमारी चौधरी के तीखे, तथ्यपूर्ण और जनहितकारी हस्तक्षेप ने सदन में नई बहस छेड़ दी है कि भारत नेट जैसी राष्ट्रीय परियोजना की निगरानी और जवाबदेही कैसे सुनिश्चित की जाए।


