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‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बिलासपुर, 11 दिसंबर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने राज्य के आंगनबाड़ी केंद्रों में कुप्रबंधन और मध्यान्ह भोजन में लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए मुख्य सचिव को नया शपथ पत्र दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। यह आदेश चीफ जस्टिस रमेश न सिन्हा और जस्टिस बीडी गुरु की डिवीजन बेंच ने कोर्ट-कमिश्नरों की ताजा रिपोर्ट देखने के बाद जारी किया।
कोर्ट-कमिश्नर अमियकांत तिवारी और ईशान वर्मा को बिलासपुर और रायगढ़ जिलों के आंगनबाड़ी केंद्रों का निरीक्षण करने की अनुमति हाईकोर्ट ने 28 अक्टूबर 2025 को दी थी। निरीक्षण के बाद दोनों अधिकारियों ने अपनी रिपोर्ट अदालत में प्रस्तुत की, जिसमें कई गंभीर कमियां उजागर हुईं।
रिपोर्ट के अनुसार बिलासपुर के मंगला क्षेत्र में बच्चों को खराब भोजन मिलने की शिकायत पर बताया गया था कि खाना बनाने और परोसने का कार्य पहले के समूह कल्याणी स्व सहायता समूह के हाथ से लेकर पहल स्वयंसेवी संस्थान को सौंप दिया गया है। लेकिन निरीक्षण में यह तथ्य गलत पाया गया। रिपोर्ट में कहा गया है कि सेंट्रल किचन में भोजन बनने के बावजूद बच्चों को परोसने का काम अब भी कल्याणी समूह के ही पुराने कर्मचारी कर रहे थे। हाईकोर्ट ने इसे प्रशासनिक लापरवाही और गलत बयानी का गंभीर मामला माना है।
रायगढ़ जिले के आंगनबाड़ी केंद्रों में भी बड़े पैमाने पर अव्यवस्था, संसाधनों की कमी और कमजोर निगरानी की जानकारी कोर्ट-कमिश्नरों ने अपनी रिपोर्ट में दी।
अदालत ने मुख्य सचिव से पूछा है कि आंगनबाड़ी व्यवस्था सुधारने के लिए राज्य सरकार ने अब तक क्या ठोस कदम उठाए हैं। इन सभी सूचनाओं को समेटते हुए नया शपथ पत्र 21 जनवरी को होने वाली अगली सुनवाई से पहले प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।


