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नयी दिल्ली, 10 दिसंबर। गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को आरोप लगाया कि कांग्रेस समेत विपक्ष के पास विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) का विरोध करने का कोई उचित कारण नहीं है और उनके विरोध का मूल मुद्दा अवैध घुसपैठियों को मतदाता सूची में रखने का है।
चुनाव सुधारों पर लोकसभा में चर्चा का समापन करते हुए शाह ने यह भी कहा कि हमारी नीति घुसपैठियों को ‘‘खोजने, मतदाता सूची से उनका नाम हटाने और देश से निकालने’’ की है, जबकि कांग्रेस समेत विपक्ष की नीति घुसपैठियों को मान्यता प्रदान कर मतदाता सूची में डालने की है।’’
शाह के बयान पर विरोध जताते हुए कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के सदस्यों ने सदन से वॉकआउट किया।
गृह मंत्री ने अपने करीब डेढ़ घंटे के भाषण में कांग्रेस पर कटाक्ष करते हुए कहा, ‘‘मैंने अपने भाषण में नेहरू, इंदिरा गांधी, राजीव गांधी पर भी सवाल किए तब इन्होंने बहिष्कार नहीं किया। घुसपैठियों के सवाल पर भाग गए।’’
उन्होंने कहा कि ‘‘विपक्ष कितनी भी बार बहिष्कार करे ले, हम एक भी घुसपैठिये को देश में नहीं रहने देंगे।’’
उन्होंने कहा कि विदेशी नागरिकों को भारत में मतदान करने का अधिकार नहीं दिया जा सकता। शाह ने कहा कि जनसांख्यिकी में यह बदलाव बहुत बड़ा खतरा है।
उन्होंने कहा कि विपक्ष देश में घुसपैठ के लिए केंद्र से सवाल करता है।
शाह ने कहा कि सरकार ने कई सीमावर्ती राज्यों में घुसपैठ रोकने के लिए बाड़ लगाने और सीमा को मजबूत करने का काम पूरा कर लिया है, केवल पश्चिम बंगाल अधूरा रह गया है क्योंकि वहां की सरकार बाड़बंदी नहीं होने दे रही।
उन्होंने पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें ‘‘बताना चाहता हूं कि घुसपैठियों को बचाओगे तो भाजपा की जीत तय है।
आप केंद्र पर सवाल कर रहे हो। आपकी कोई जिम्मेदारी नहीं है? ये देश के भविष्य और सुरक्षा के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। बिहार की जनता ने (चुनाव में) महान फैसला दे दिया है और बंगाल भी यह करने जा रहा है।’’
शाह ने विपक्ष पर मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर झूठ फैलाने और पूरी दुनिया में भारतीय लोकतंत्र की छवि धूमिल करने का आरोप लगाते हुए दावा किया कि चुनावों में कांग्रेस की हार की वजह ईवीएम एवं मतदाता सूची नहीं, बल्कि नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी का नेतृत्व है।
उन्होंने विपक्षी सदस्यों की टोका-टोकी के बीच कहा कि एक दिन कांग्रेस के कार्यकर्ता उनसे हार का हिसाब मांगेंगे।
शाह ने कहा कि संविधान निर्वाचन आयोग को मतदाता सूची बनाने का पूर्ण अधिकार देता है तथा एसआईआर मतदाता सूची के शुद्धीकरण की प्रक्रिया है।
उन्होंने विपक्ष पर एसआईआर पर चार महीने से एक तरफा झूठ फैलाने और जनता को गुमराह करने का प्रयास करने का आरोप लगाया।
शाह ने कहा कि देश का लोकतांत्रिक इतिहास 1952 में शुरू हुआ और तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के समय 1953 में पहले एसआईआर से लेकर 2003 तक कई बार यह कवायद देश में हुई।
उन्होंने कहा कि 2010 में एक चुनाव आयुक्त ने निर्णय किया कि रिटर्निंग ऑफिसर किसी मतदाता का नाम सूची से नहीं काट सकते, इसलिए जिन लोगों की मृत्यु हो गई, जिनका स्थानांतरण हुआ, उनके नाम काटे नहीं गए।
शाह ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी अपने संवाददाता सम्मेलनों में मतदाता सूचियों में त्रुटियों की बात करते रहे हैं और निर्वाचन आयोग ऐसी गड़बड़ियों को दूर कर शुद्धीकरण के लिए ही तो एसआईआर कर रहा है।
शाह ने कहा, ‘‘संविधान के अनुच्छेद 326 में मतदाता की पात्रता, योग्यता, और मतदाता होने की शर्तें तय की गई है। सबसे पहली शर्त है, मतदाता भारत का नागरिक होना चाहिए, विदेशी नहीं होना चाहिए। ये (विपक्ष) कह रहे हैं कि चुनाव आयोग एसआईआर क्यों कर रहा है? उसका (निर्वाचन आयोग) दायित्व है, इसलिए कर रहा है।’’
उन्होंने कहा कि विशेष गहन पुनरीक्षण यही है कि किसी की मृत्यु हो गई तो नाम काटा जाए और अवैध विदेशी नागरिकों के नाम चुन चुनकर हटाये जाएं।
उन्होंने कहा, ‘‘क्या किसी भी देश का लोकतंत्र सुरक्षित रह सकता है जब प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री कौन बनेगा, यह घुसपैठिये तय करेंगे।’’
गृह मंत्री ने कहा, ‘‘आपको ऐसा लगता है कि आप सरकार की छवि को धूमिल कर रहे हैं, लेकिन असल में आप पूरी दुनिया में भारत के लोकतंत्र की छवि धूमिल कर रहे हैं।’’
शाह ने कहा कि यह नयी परंपरा शुरू हुई है कि चुनाव नहीं जीते तो निर्वाचन आयोग को बदनाम करो, जो लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं है।
उन्होंने कई चुनावों में विपक्षी दलों की जीत का उल्लेख करते हुए कहा कि अगर मतदाता सूची खराब थी तो शपथ क्यों ली?
गृह मंत्री ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर कटाक्ष करते हुए कहा, ‘‘ईवीएम की दलील गले नहीं उतरती तो अब वोट चोरी का मुद्दा लेकर आए। वोट चोरी का मुद्दा लेकर पूरे बिहार में यात्रा निकाली। फिर भी हार गए। हारने का कारण आपका नेतृत्व है, हारने का कारण ईवीएम और मतदाता सूची नहीं है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘इनके जमाने में पूरी मतपेटियां हाइजेक हो जाती थीं। ईवीएम आने से यह बंद हो गया। चुनाव की चोरी बंद हो रही है इसलिए इनके पेट में दर्द हो रहा है।’’
उन्होंने कहा कि भाजपा कई चुनाव हारी, लेकिन कभी किसी मुख्य निर्वाचन आयुक्त और निर्वाचन आयोग पर सवाल खड़े नहीं किए।
उन्होंने वोट चोरी के कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए कुछ घटनाएं गिनाईं और आरोप लगाया कि विपक्षी पार्टी का वोट चोरी का इतिहास रहा है।
शाह ने दावा किया कि निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के अनुसार मई 2014 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार बनने के बाद से आयोग को चुनाव सुधार के संबंध में एक भी सुझाव कांग्रेस से नहीं मिला है।
उन्होंने कहा कि 2023 के कानून में चुनाव आयुक्तों को दंडाभाव प्रदान करने और सीसीटीवी फुटेज 45 दिन बाद हटाने का प्रावधान 1950 के जन प्रतिनिधित्व अधिनियम की धाराओं से संरेखित करते हुए ही किया गया है।
मुख्य निर्वाचन आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति करने वाली चयन समिति से प्रधान न्यायाधीश को बाहर रखने के विपक्ष के आरोपों पर शाह ने कहा कि 73 वर्ष तक इस देश में चुनाव आयुक्त की नियुक्ति का कोई कानून ही नहीं था।
उन्होंने कहा कि 2023 में इस बाबत कानून संसद ने पारित किया जिसके मुताबिक इस समिति में प्रधानमंत्री, नेता प्रतिपक्ष और एक केंद्रीय मंत्री होते हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘हमारे समय तो चयन प्रक्रिया और पारदर्शी हो गई है। आपकी 33 प्रतिशत हिस्सेदारी है। आपके समय तो पूरी हिस्सेदारी आपकी थी।’’ (भाषा)


