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'वंदे मातरम' के 150 वर्ष पूरे होने के मौक़े पर लोकसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस पर चर्चा शुरू की. इस दौरान पीएम मोदी ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का भी ज़िक्र किया.
पीएम मोदी ने सवाल किया कि जब बापू को 'वंदे मातरम नेशनल एंथम के रूप में दिखता था तो इसके साथ अन्याय क्यों हुआ?'
प्रधानमंत्री ने कहा, "दक्षिण अफ़्रीका से प्रकाशित एक साप्ताहिक पत्रिका इंडियन ओपिनियन में महात्मा गांधी ने 2 दिसंबर 1905 को लिखा था- 'गीत वंदे मातरम जिसे बंकिम चंद्र ने रचा है, पूरे बंगाल में अत्यंत लोकप्रिय हो गया है. स्वदेशी आंदोलन के दौरान बंगाल में विशाल सभाएं हुईं, जहां लाखों लोग इकट्ठा हुए और बंकिम का यह गीत गाया'."
"गांधी जी आगे लिखते हैं- 'यह गीत इतना लोकप्रिय हो गया है जैसे ये हमारा नेशनल एंथम बन गया है. इसकी भावनाएं महान हैं और यह अन्य राष्ट्रों के गीतों से अधिक मधुर है. इसका एकमात्र उद्देश्य हममें देशभक्ति की भावना जगाना है. यह भारत को मां के रूप में देखता है और उसकी स्तुति करता है'."
पीएम मोदी ने आगे कहा, "जो वंदे मातरम 1905 में महात्मा गांधी को नेशनल एंथम के रूप में दिखता था, देश के हर कोने में, हर व्यक्ति के लिए वंदे मातरम की ताकत बहुत बड़ी थी. वंदे मातरम इतना महान था, जिसकी भावना इतनी महान थी तो फिर पिछली सदी में इसके साथ इतना बड़ा अन्याय क्यों हुआ, वंदे मातरम के साथ विश्वासघात क्यों हुआ? ये अन्याय क्यों हुआ?
उन्होंने कहा, "वो कौन सी ताकत थी जिसकी इच्छा खुद पूज्य बापू की भावनाओं पर भी भारी पड़ गई? जिसने वंदे मातरम जैसी पवित्र भावना को भी विवादों में घसीट दिया."
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरे होने पर हमें इन सब परिस्थितियों के बारे में हमारी नई पीढ़ी को बताना ज़रूरी है. (bbc.com/hindi)


