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‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायपुर, 8 दिसंबर। वित्त एवं आवास मंत्री ओपी चौधरी ने जमीन की रजिस्ट्री (गाइडलाइन) दरों में वृद्धि में किए गए संशोधनों पर कहा कि सरकार मुख्यमंत्री के नेतृत्व में जन हितों पर आधारित सुधारों के लिए समर्पित है। उन्होंने कहा कि काले धन पर नियंत्रण,किसानों को उचित मुआवजा, मध्यम वर्ग को अधिकाधिक लोन और साथ ही साथ रियल स्टेट के कारोबारी के हित, सरकार की प्राथमिकता है। जनहित में उचित, न्यायोचित और व्यवहारिक सुधारों के लिए सरकार सदैव सजग है।
एकात्म परिसर में आयोजित पत्रकार वार्ता में वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने इन सुधारों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सरकार ने बीते दो साल में पंजीयन प्रक्रिया और राजस्व संबंधित नियमों में बड़े सुधार किए हैं।
चौधरी ने पीपीपी के जरिए बताया कि गाइडलाइन दरों में बदलाव करते हुए सिंचित और असिंचित जमीन के दरों में अंतर स्पष्ट किया गया। इससे सिंचित भूमि के दाम बढ़ेंगे। असिंचित भूमि के दर अब 20 प्रतिशत कम होंगे।रजिस्ट्री स्लैब में बड़े संशोधन किए गए।पहले 9400 से अधिक कंडिकाएँ थीं, जिन्हें घटाकर 5700 किया गया।
अब सभी श्रेणियों को मिलाकर 714 कंडिकाओं में समेकित किया गया।पूरी रजिस्ट्री प्रक्रिया को ऑनलाइन कर दिया गया है।30 साल पुराने सभी दस्तावेज डिजिटलीकृत किए गए। रजिस्ट्री के दौरान गवाहों की आधार से पहचान अनिवार्य की गई।
भारमुक्त प्रमाणपत्र भी अब ऑनलाइन उपलब्ध होगा। भुइया सॉफ्टवेयर को अपग्रेड कर पंजीयन प्रक्रिया को सरल बनाया गया।
श्री चौधरी ने कहा कि 1908 के पंजीयन एक्ट का अध्ययन कर आवश्यक संशोधन किए गए और इसके लिए संशोधन विधेयक लाया गया।कुल 34 एक्टों में सुधार किया गया है।
उन्होंने कहा कि पंजीयन में होने वाली गड़बड़ियों को रोकने के लिए सतर्कता प्रकोष्ठ का गठन किया गया।शुल्क में बड़ी राहत देते हुए पंजीयन शुल्क को अब शून्य कर दिया गया है। पारिवारिक दान में पहले 0.8% शुल्क लिया जाता था, अब इसे घटाकर सिर्फ 500 रुपये कर दिया गया है। पेड़ों पर होने वाली रजिस्ट्री को शून्य शुल्क किया गया है।डायवर्सन भूमि पर पंजीयन शुल्क सामान्य ही रहेगा।


