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सुनाली ख़ातून भारत लौटीं, तृणमूल कांग्रेस ने कहा 'एक बड़ी ग़लती में सुधार हुआ'
06-Dec-2025 10:33 AM
सुनाली ख़ातून भारत लौटीं, तृणमूल कांग्रेस ने कहा 'एक बड़ी ग़लती में सुधार हुआ'

SAMIRUL ISLAM


पश्चिम बंगाल के बीरभूम ज़िले की रहने वाली सुनाली ख़ातून को जून 2025 में अवैध बांग्लादेशी प्रवासी होने के शक़ में बांग्लादेश भेज दिया गया था.

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को 'मानवीय आधार' पर सुनाली ख़ातून और उसके आठ साल के बच्चे को भारत में प्रवेश की अनुमति दे दी थी.

तृणमूल कांग्रेस ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "छह लंबे महीनों के बाद आखिरकार न्याय की जीत हुई. बंगाल की महिला सुनाली खातून को एक बंगाल-विरोधी सोच के चलते अपने ही देश से बाहर धकेल दिया गया था.आज जब सोनाली लौट रही है, तो यह एक बड़ी गलती के ठीक होने जैसा लगता है."

पार्टी के राज्यसभा सांसद और पश्चिम बंगाल प्रवासी मज़दूर बोर्ड के चेयरमैन समीरुल इस्लाम ने एक्स पर किए एक पोस्ट में कहा है, “अंततः बांग्ला विरोधी ज़मींदारों के ख़िलाफ़ एक लंबी लड़ाई के बाद सुनाली ख़ातून और उनका नाबालिग बेटा भारत लौट आए हैं.”

उन्होंने कहा, “गर्भवती सुनाली को इस साल जून में ज़बरदस्ती भारत से निर्वासित कर दिया गया था. छह महीनों की अकल्पनीय पीड़ा के बाद वो और उनका बेटा अपनी पैतृक भूमि लौट आए हैं.”

सुनाली ख़ातून और उनका परिवार दिल्ली में कचरा बीनने का काम करता था जब जून 2025 में उन्हें पुलिस ने अवैध बांग्लादेशी प्रवासी होने के शक़ में हिरासत में लिया था.

सुनाली को असम ले जाया गया था जहां से उन्हें बांग्लादेश की सीमा के भीतर छोड़ दिया गया था.

भारत लौटने के प्रयास में उन्हें बांग्लादेश की पुलिस ने पकड़ लिया था. बांग्लादेश में सुनाली को जेल में रखा गया था.

बुधवार को सुप्रीम कोर्ट के चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमल्या बागची की पीठ ने पश्चिम बंगाल सरकार से बच्चे की देखभाल करने को कहा था. अदालत ने बिरभूम जिले के मुख्य चिकित्सा अधिकारी को निर्देश दिया कि गर्भवती सुनाली खातून को हर संभव चिकित्सकीय मदद दी जाए. (bbc.com/hindi)


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