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वडोदरा, 30 नवंबर। पूर्व उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने रविवार को कहा कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकारों ने सिर्फ़ एक परिवार को प्रमुखता दी और उसके सदस्यों के नाम पर कई संस्थानों का नामकरण किया, जबकि सरदार वल्लभभाई पटेल और सुभाष चंद्र बोस जैसे नेताओं को नजरअंदाज किया।
नायडू ने सभी धर्मों और जातियों के लोगों से एकजुट रहने का भी आग्रह किया, खासकर जब भारत दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है।
उन्होंने गुजरात के वडोदरा में ‘सरदार ऐट 150 यूनिटी मार्च’ में भाग लिया। यह मार्च पटेल की 150वीं जयंती के उपलक्ष्य में 26 नवंबर को उनके पैतृक गांव करमसद से शुरू हुआ था। मार्च 5 दिसंबर को नर्मदा ज़िले के एकता नगर स्थित स्टैच्यू ऑफ यूनिटी पर समाप्त होगा।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर परोक्ष रूप से कटाक्ष करते हुए, पूर्व उपराष्ट्रपति नायडू ने याद दिलाया कि कैसे उन्होंने ‘‘भारत को एक बर्बाद अर्थव्यवस्था’’ बताने संबंधी एक अमेरिकी नेता (राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप) की टिप्पणी दोहराई थी।
नायडू ने कहा कि हालांकि, अगले ही दिन, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने कहा कि भारत दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है।
उन्होंने कहा, ‘‘भारत दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बन गया है। साथ ही, देश में एकता भी होनी चाहिए। इस तरह, सरदार पटेल द्वारा दिखाए गए मार्ग - राष्ट्र प्रथम, पार्टी बाद में, स्वयं अंत में - का अनुसरण करते हुए हम सभी को जाति, पंथ, धर्म और क्षेत्र से ऊपर उठकर इन सिद्धांतों को ध्यान में रखते हुए काम करना चाहिए।’’
नायडू ने कहा कि कांग्रेस के शासनकाल में सिर्फ़ एक परिवार को ही प्रमुखता दी गई, जबकि सरदार पटेल और सुभाष चंद्र बोस जैसे नेताओं के जीवन पर कभी चर्चा नहीं हुई।
उन्होंने कहा, ‘‘स्टैच्यू ऑफ़ यूनिटी राष्ट्रीय गौरव है। यह एक उल्लेखनीय उपलब्धि है, जिसके लिए मैं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को हार्दिक बधाई देता हूं। कांग्रेस के शासनकाल में, उन्होंने एक परिवार के बारे में बहुत कुछ लिखा और ज़्यादातर संस्थानों का नामकरण उसी परिवार के सदस्यों के नाम पर किया गया। वे स्वार्थी थे।’’
पूर्व उपराष्ट्रपति ने कहा, ‘‘आज वडोदरा में, भारत के लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती के अवसर पर मार्च में भाग लेने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की थीम पर आधारित यह यूनिटी मार्च, सरदार वल्लभभाई पटेल के राष्ट्रीय एकता, संप्रभुता और आत्मनिर्भरता के प्रति समर्पण को एक भावभीनी श्रद्धांजलि है।’’ (भाषा)


