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नयी दिल्ली, 30 नवंबर। संसद के शीतकालीन सत्र की शुरुआत हंगामेदार रहने और इसमें गतिरोध पैदा होने के आसार रविवार को उस वक्त दिखाई दिए जब सर्वदलीय बैठक में विपक्षी दलों ने एक सुर में यह मांग उठाई कि विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) पर चर्चा कराई जानी चाहिए।
सरकार ने हालांकि कहा कि संसद की कार्यवाही अच्छी तरह चलनी चाहिए और वह गतिरोध की स्थिति को टालने के लिए विपक्षी दलों के साथ बातचीत जारी रखेगी।
सर्वदलीय बैठक के बाद संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने चुटीले अंदाज में यह भी कहा कि यह शीतकालीन सत्र है और इसमें सबको ‘‘ठंडे दिमाग से’’ काम करना चाहिए।
कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस और कई अन्य विपक्षी दलों ने सत्र की शुरुआत से एक दिन पहले बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में एसआईआर के साथ ही दिल्ली विस्फोट की पृष्ठभूमि में राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया।
इसके साथ ही, उन्होंने वायु प्रदूषण, विदेश नीति, किसानों की स्थिति, महंगाई, बेरोजगारी और कुछ अन्य विषयों पर सत्र के दौरान चर्चा कराने का आग्रह किया।
बिहार विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की प्रचंड जीत से उत्साहित केंद्र सरकार इस सत्र में 14 विधायक पेश कर सकती है।
इस सर्वदलीय बैठक में 36 राजनीतिक दलों के 50 नेता शामिल हुए।
बैठक में सरकार की तरफ से रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह , स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू और संसदीय कार्य राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल शामिल हुए।
कांग्रेस के प्रमोद तिवारी, कोडिकुनिल सुरेश, तृणमूल कांग्रेस के नेता डेरेक ओब्रायन, समाजवादी पार्टी के राम गोपाल यादव, द्रमुक के तिरुचि शिवा और कई अन्य दलों के नेता बैठक में शामिल हुए।
किरेन रीजीजू ने सर्वदलीय बैठक को सकारात्मक करार देते हुए कहा, ‘‘ बैठक में जो भी सुझाव आए हैं, उनको विचार के बाद बीएसी (कार्य मंत्रणा समिति) में रखा जाएगा। कुल मिलाकर 36 दलों के 50 नेता शामिल हुए। सरकार की तरफ से आश्चासन देता हूं कि संसद का शीतकालीन सत्र अच्छी तरह से चलाने के लिए विपक्ष के साथ बातचीत करते रहेंगे। विपक्ष नेताओं से अनुरोध है कि संसद को अच्छी तरह से चलाने में सहयोग करें।’’
रीजीजू का कहना था, ‘‘लोकतंत्र, विशेष रूप से संसदीय लोकतंत्र में गतिरोध होते हैं, राजनीतिक दलों में मतभेद होते हैं। इसके बावजूद हम सब तय करें कि सदन में गतिरोध पैदा नहीं करना है और अपनी बात रखकर विरोध दर्ज कराना है, तो सदन चलेगा।’’
उन्होंने एसआईआर के मुद्दे के बारे में पूछे जाने पर कहा, ‘‘विपक्षी दलों में कई नेता है जो संसद चलाना और मुद्दे उठाना चाहते हैं। इसलिए यह कहना उचित नहीं है कि सभी विपक्षी दल एसआईआर का मुद्दा उठाकर संसद की कार्यवाही बाधित करना चाहते हैं।’’
उनका कहना था कि विपक्ष ने कई मुद्दे रखे हैं, उनमें से एसआईआर भी एक है।
रीजीजू ने कहा, ‘‘एसआईआर पर चर्चा नहीं हुई तो संसद नहीं चलने देंगे, ऐसा सब राजनीतिक दलों ने नहीं कहा है। किसी ने बाहर बयान दिया है तो उसे सामूहिक बयान नहीं मानना चाहिए।’’
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार द्वारा संसद के शीतकालीन सत्र से एक दिन पहले बुलाई गई सर्वदलीय बैठक महज एक औपचारिकता थी।
सर्वदलीय बैठक के बाद लोकसभा में कांग्रेस के उप नेता गौरव गोगोई ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘ऐसा लगता है कि भाजपा, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व वाली सरकार लोकतंत्र, संसदीय परंपरा और मर्यादा को खत्म करने की कोशिश कर रही है।’’
उन्होंने दावा किया कि सरकार खुद संसद को ‘डिरेल करने’ (पटरी से उतारने) की कोशिश कर रही है।
गोगोई का कहना था, ‘‘हमने कहा है कि हमें राष्ट्रीय सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए सुरक्षा मुद्दों पर चर्चा करने की जरूरत है। दिल्ली में विस्फोट कानून व्यवस्था और गृह मंत्रालय की विफलता का सबूत है, लेकिन ऐसा नहीं लगता कि सरकार इस पर किसी अल्पकालिक चर्चा के लिए तैयार है।’’
उन्होंने कहा कि सरकार के समक्ष वायु प्रद्रूषण, विदेश नीति, किसानों की स्थिति और प्राकृतिक आपदा से जुड़े विषयों पर भी चर्चा की मांग की गई है।
राज्यसभा में कांग्रेस के उप नेता प्रमोद तिवारी ने कहा कि यदि सरकार एसआईआर पर चर्चा के लिए तैयार नहीं होती है तो यह स्पष्ट हो जाएगा कि वह संसद नहीं चलने देना चाहती।
समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता रामगोपाल यादव ने कहा कि यदि एसआईआर पर चर्चा नहीं कराई गई तो संसद में गतिरोध होगा।
उन्होंने कहा, ‘‘हमने एसआईआर का मुद्दा उठाया है क्योंकि बड़े पैमाने पर मैंने अनियमितताएं देखी हैं। लोगों के नाम काटे जा रहे हैं, लोगों के आवेदन में गड़बड़ी की जा रही...बिहार में घपला हुआ है।’’
उन्होंने कहा कि सरकार निर्वाचन आयोग का नाम लेकर चर्चा कराने से पल्ला नहीं झाड़ सकती।
यादव ने कहा, ‘‘मान लीजिए कि निर्वाचन आयोग प्रधानमंत्री का नाम काट दे तो क्या इस पर चर्चा नहीं होगी?’’
तृणमूल कांग्रेस के नेता कल्याण बनर्जी ने कहा कि उनकी पार्टी सदन चलाने के लिए सहयोग को तैयार है, लेकिन इसके लिए सरकार को भी सहयोग करना होगा।
उन्होंने दावा किया, ‘‘एसआईआर पर चर्चा होनी चाहिए। कई बीएलओ की मौत हुई है, यह गंभीर मुद्दा है।’’
बनर्जी ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी ‘‘खामियों’’ पर भी चर्चा होनी चाहिए।
द्रमुक नेता तिरुचि शिवा ने कहा कि सभी विपक्षी दल इसको लेकर सहमत हैं कि शीतकालीन सत्र में एसआईआर पर चर्चा होनी चाहिए।
विपक्षी दल सोमवार सुबह संसद भवन में बैठक कर आगे की रणनीति तय करेंगे।
संसद का शीतकालीन सत्र सोमवार से शुरू होकर 19 दिसंबर को समाप्त होगा।
सरकार ने संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान पेश करने के लिए कुछ प्रमुख विधेयकों को सूचीबद्ध किया है जिनमें निजी कंपनियों के लिए असैन्य परमाणु क्षेत्र को खोलने के प्रावधान वाला एक विधेयक भी शामिल है।
‘परमाणु ऊर्जा विधेयक, 2025’ भारत में परमाणु ऊर्जा के उपयोग और विनियमन को नियंत्रित करने के उद्देश्य लाया जा रहा है। (भाषा)


