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कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने रविवार को पार्टी के ''नव संकल्प शिविर'' के समापन सत्र को संबोधित किया.
इस दौरान उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी का कनेक्शन जनता से टूटा है और ये सभी को मानना होगा और एक बार जनता से वही कनेक्शन जोड़ना होगा.
राहुल गांधी ने कहा, ''हमें बिना सोचे जनता के बीच जाकर बैठ जाना चाहिए. जो उनकी समस्या है, उनको समझना चाहिए. जो हमारा पहले जनता के साथ कनेक्शन होता था, जो कांग्रेस पार्टी का कनेक्शन जनता से टूटा है उसे मानना होगा और ये कनेक्शन फिर से बनाना होगा. जनता समझती है कि कांग्रेस पार्टी ही ये काम कर सकती है और देश को आगे ले जा सकती है.''
राहुल गांधी ने आगे कहा कि कांग्रेस अब जनता के बीच जाएगी और यात्राएं करेगी. उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी ने निर्णय लिया है कि अक्टूबर महीने में पूरी कांग्रेस पार्टी जनता के बीच जाएगी और यात्रा करेगी.
राहुल गांधी का कहना है, ''शॉर्टकट से ये नहीं होने वाला है. मैं बता रहा हूं जो सोचता है कि शॉर्ट कट करके ये काम किया जा सकता है, ये काम ऐसे नहीं हो सकता है. ये काम पसीने से ही किया जा सकता है. हम सब में ये करने की क्षमता है, ये हमारे डीएनए में है. हमें एक बार फिर जनता के बीच में जाना है.''
कांग्रेस के चिंतन शिविर को संबोधित करते हुए राहुल गांधी, केंद्र सरकार पर भी बरसते नज़र आए. राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर बेरोज़गारी को बढ़ाने और अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया.
उन्होंने कहा, ''आज हिंदुस्तान के युवा को रोज़गार नहीं मिल सका है. नरेंद्र मोदी ने 2 करोड़ युवाओं को रोज़गार देने की बात की थी. लेकिन आज से ज़्यादा बेरोज़गारी कभी नहीं रही. क्योंकि रोज़गार पैदा करने वाली रीढ़ की हड्डी को नरेंद्र मोदी और उनकी विचारधारा ने तोड़ दिया है. सरकार ने युवाओं के भविष्य को नष्ट कर दिया है.''
राहुल गांधी ने कहा कि उनकी लड़ाई बीजेपी और आरएसएस की तरफ़ से फैलाए जा रहे नफ़रत के ख़िलाफ़ है.
उन्होंने कहा, ''हमारे खिलाफ बड़ी शक्तियां हैं. आरएसएस, बीजेपी का संगठन, हिंदुस्तान के सारी संस्थाएं. ये मत सोचिए कि हम राजनीतिक पार्टी से लड़ रहे हैं, राजनीतिक पार्टी सिर्फ एक भाग है, हम हिंदुस्तान के हर संस्था से लड़ रहे हैं. हम हिंदुस्तान के सबसे बड़े क्रोनी कैपटलिस्ट के ख़िलाफ़ लड़ रहे हैं. मगर मैं हर कांग्रेस के कार्यकर्ता को कहना चाहता हूं कि आपको घबराने की कोई ज़रूरत नहीं है. क्योंकि ये देश सच्चाई को मानता है. ये देश सच्चाई का देश है.'' (bbc.com)


