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देश में गेहूं की कमी के कारण क्या सरकार ने निर्यात पर रोक लगाई?
15-May-2022 11:42 AM
देश में गेहूं की कमी के कारण क्या सरकार ने निर्यात पर रोक लगाई?

 

भारत सरकार ने शुक्रवार देर शाम भारत और पड़ोसी मुल्कों में फूड सिक्योरिटी का हवाला देते हुए गेहूं के निर्यात पर रोक लगाने का फैसला किया है. हालांकि भारत का कहना है कि ज़रूरतमंद देशों को सरकार के स्तर पर तय किए जाने पर निर्यात करेगा.

अंग्रेज़ी अख़बार इकोनॉमिक टाइम्स में छपी ख़बर के मुताबिक़ सरकार ने देश में गेहूं और आटे की बढ़ती कीमत को काबू करने के लिए ये क़दम उठाया है, हाल ही में गेहूं के निर्यात की मांग में ज़बरदस्त उछाल आया है और इस साल गेहूं की फ़सल भी थोड़ी कमज़ोर हुई है.

भारत ने 13 मई को तत्काल प्रभाव से सभी प्रकार के गेहूं- हाई प्रोटीन दुरुम से लेकर सामान्य नरम रोटियों के लिए इस्तेमाल होने वाले सभी गेहूं के निर्यात को 'फ्री' से 'प्रोहेबिटेडट' श्रेणी में डाल दिया है.

गेहूं पर लगी अचानक निर्यात रोक ऐसे वक़्त में लगाई गई है जब 12 मई को आए आंकड़ों के मुताबिक़ उपभोक्ता मूल्य मुद्रास्फीति अप्रैल में 7.79 प्रतिशत पर पहुंच गई, ये दर आठ साल के सबसे उच्च स्तर पर है . वहीं, खुदरा खाद्य मुद्रास्फीति बढ़कर 8.38 प्रतिशत हो गई है.

बढ़ती खाद्य मुद्रास्फीति को अगर अभी अलग भी रखें तो यह निर्णय इसलिए भी लिया गया है क्योंकि इस साल सरकार की गेहूं की खरीद 15 साल के सबसे निचले स्तर पर है. इस साल सरकार ने अब तक केवल 1.8 करोड़ मैट्रिक टन गेहूं की ख़रीद की है वहीं साल 2021-22 में 4.3 करोड़ मैट्रिक टन गेहूं की ख़रीद हुई थी.

इकोनॉमिक टाइम्स अख़बार से बात करते हुए विपणन सचिव बीवीआर सुब्रम्ण्यम ने कहा, "दुनिया में गेहूं की बढ़ती मांग और आने वाले वक्त में होने वाली संभावित कमी को देखते हुए अगर लोग अनाज का भंडारण करने लगते हैं, इसलिए ऐसा ना हो तो हमने निर्यात पर रोक लगाई है. इस फैसले से ये सुनिश्चित होगा कि भारत में ऐसा ना हो."

आधिकारिक डेटा के मुताबिक़, 8 मई तक एक किलो आटे के दाम 33 रुपये था इसकी बीते साल से तुलना करें तो यह कीमत 13% ज़्यादा है.

बीते वित्त वर्ष यानी 31 मार्च 2022 को पूरा होने वाले वित्त वर्ष में भारत का गेहूं निर्यात 2.05 अरब डॉलर की कीमत के साथ 72 लाख मैट्रिक टन था जो अब तक का सबसे ज़्यादा निर्यात है.

एक अन्य अख़बार इंडियन एक्सप्रेस लिखता है कि सुब्रमण्यम के अनुसार, इस पूरे निर्यात का लगभग आधा हिस्सा बांग्लादेश में गया.

उन्होंने कहा, "हमने अपने पड़ोसियों के लिए और बड़ी संख्या में ज़रूरतमंद देशों के लिए अब भी निर्यात की संभावना खुली रखी है, अगर उनकी सरकारें अनुरोध करती हैं तो निर्यात किया जा सकता है."

फरवरी के मध्य में, कृषि मंत्रालय ने 2021-22 गेहूं की फसल (2022-23 मार्केट के लिए) का अनुमान 111.32 मैट्रिक टन था. इसके आधार पर, यह उम्मीद की जा रही थी कि गेहूं शिपमेंट चालू वित्त वर्ष में 1 करोड़ मैट्रिक टन से 1.5 मैट्रिक टन तक होगा.

गेहूं की इस साल फ़सल कमज़ोर होने का सबसे बड़ा कारण है मौसम. मार्च के मध्य से तापमान में अचानक वृद्धि से फसलों को नुकसान हुआ. मार्च वह समय है जब गेहूं में स्टार्च, प्रोटीन और अन्य शुष्क पदार्थ जमा होते हैं इसके लिए तापमान 30 डिग्री सेल्सियस रेंज से ज़्यादा नहीं होना चाहिए. ये ताममान अनाज भरने और अनाज के दानों का वजन बढ़ाने में सहायक होता है. लेकिन इस साल मार्च के मध्य में तापमान 35 डिग्री और महीने के अंत तक 40 डिग्री पार कर गया. इससे अनाज समय से पहले पक गया और दाने सिकुड़ते चले गए.(bbc.com)


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