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शहीद महेन्द्र कर्मा विवि दीक्षांत समारोह
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
जगदलपुर, 5 मार्च। राज्यपाल अनसुईया उइके ने कहा कि बस्तर में 69 प्रतिशत आदिवासी क्षेत्र है, इसके बावजूद भी छात्राओं की संख्या ज्यादा देखने को मिली, जिन्हें यह उपाधि व गोल्ड मेडल मिला है।
शनिवार को शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय में राज्यपाल के आतिथ्य में तृतीय दीक्षांत समारोह का आयोजन किया गया, जिसमें छात्र छात्राओं को उपाधि के साथ ही गोल्ड मेडल देकर सम्मनित भी किया गया।
राज्यपाल अनसुईया उइके ने उपाधि व गोल्ड मैडल पाने वाले सभी को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि परिश्रम करते रहने से लक्ष्य की प्राप्ति होती है। दो वर्षों से जो कोरोना की लहर आई थी, उसने पूरे देश को हिला दिया, छात्र-छात्राओं की पढ़ाई काफी बाधित हुई, कठिन दौर से सामना करने के बाद भी हौसला नहीं छोड़ा,जिसके चलते सफलता हाथ आई। चुनौतियाँ का डटकर सामना भी किया गया।

उन्होंने कहा कि जितना बड़ा संकल्प होता है मेहनत उतनी ही कठिन होती है, पढ़ाई के दौरान काफी डिग्री मिल जाएगी, लेकिन व्यवहारिक ज्ञान जरूरी है जीवन के लिए, जिसमें आचार, व्यवहार और संकल्प जरूरी है।
उन्होंने कहा कि बस्तर की छवि बदलने की जरूरत है। आदिवासी अपने जनजाति के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी की लाइब्रेरी बना रहे हंै, जिनसे यहां शहीद स्वतंत्रता सेनानी के बारे में बस्तर के लोग जान सकेंगे, वहीं इस बात की चर्चा भी किया गया है कि शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय को केन्द्रीय विश्वविद्यालय बनाने के लिए भी योजना बनाई जा रही है।
कुलपति शैलेन्द्र सिंह ने कहा कि वर्ष 2008 में इसकी स्थापना किया गया था, जिसका उद्देश्य बस्तर के अंदरूनी क्षेत्रो से आने वाले बच्चों को शिक्षित करना है, विश्वविद्यालय होने के चलते यहां का काफी दायित्व बढ़ा है, यहां पर पढऩे आ रहे बच्चों के लिए 100 बिस्तरों का हॉस्टल बन चुका है, जिसे जल्द ही शुरू किया जाएगा, जबकि एक का भूमिपूजन होना है, वहीं आदिवासी बच्चों के ट्रांजिट हॉस्टल का निर्माण भी हो चुका है, जिसे 10 दिन के अंदर शुरू कर दिया जाएगा।
दीक्षांत समारोह में कांकेर सांसद मोहन मंडावी, उच्च शिक्षा मंत्री उमेश पटेल, उद्योग मंत्री कवासी लखमा, छग विस उपाध्यक्ष मनोज सिंह मंडावी नहीं पहुंचे।
एनएसयूआई ने ऑफलाइन परीक्षा का किया विरोध

एनएसयूआई के पदाधिकारी कॉलेज की ऑफलाइन परीक्षा का विरोध करते हुए राज्यपाल को ज्ञापन सौंपने जा रहे थे, इस दौरान उन्हें पुलिस ने रोका। पुलिस से झूमाझटकी भी हुई। मामला शांत होने के बाद उन्होंने राज्यपाल से मिलकर ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन में बताया कि महाविद्यालयों का संचालन व पढ़ाई ऑनलाइन माध्यम से कराई गई। बस्तर एक आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र है, यहां बहुत से छात्रों के पास ऑनलाईन पढ़ाई के लिए साधन नहीं है, जिससे बहुत से विद्यार्थी पढ़ाई से वंचित रहे हैं, इन परिस्थितियों के बीच अगर परीक्षा ऑफलाइन होने की स्थिति बनती है, तो बहुत से छात्रों का भविष्य खराब हो सकता है, जिसके चलते सभी छात्रों की मांग है कि सेमेस्टर परीक्षा जिस तरह से छात्र हित को देखते हुए आनलाइन माध्यम से संचालित करने का आदेश जारी किया है, उसी तरह इस वर्ष सालाना परीक्षा को आनलाईन माध्यम से करवाने का प्रयास किया जाए।


