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सडक़ निर्माण में लगी 5 गाडिय़ों को नक्सलियों ने फूंका
05-Mar-2022 3:39 PM
  सडक़ निर्माण में लगी 5 गाडिय़ों को नक्सलियों ने फूंका

  बैनर टांग ठेकेदार को जान से मारने की धमकी 
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
कांकेर, 5 मार्च।
सडक़ निर्माण में लगे 5 वाहनों को नक्सलियों ने आग के हवाले कर दिया। जिससे 1 जेसीबी, 2 मिक्सचर मशीन, 2 हाइवा वाहन जलकर राख हो गए है। नक्सलियों ने वाहनों में आगजनी करने के बाद में बैनर टांग कर ठेकेदार को जान से मारने की धमकी भी दी है। घटना की रिपोर्ट ठेकेदार ने कांकेर पुलिस थाना पहुंच कर दर्ज कराई है। एसपी शलभ सिन्हा ने घटना की पुष्टि की है।

जिला मुख्यालय से लगभग 25 किलोमीटर ग्राम मर्रापी और कलमुच्चे के मध्य सडक़ निर्माण का कार्य चल रहा है। जहाँ कुएंमारी एरिया कमेटी के वर्दीधारी नक्सलियों मर्रामपानी पहुंच कर निर्माण कार्यो ंमें लगे वाहनों में आग लगा दी।  
आगजनी की घटना के बाद नक्सलियों ने इसका वीडियो भी बनाया है, जिसमें वहां मौजूद बड़ी संख्या में शस्त्र वर्दीधारी नक्सली दिखाई द़े रहे हैं। नक्सलियों ने वाहनों में आगजनी करने के बाद में बैनर टांग कर ठेकेदार को जान से मारने की धमकी भी दी है। घटना की रिपोर्ट ठेकेदार ने कांकेर पुलिस थाना पहुंच कर दर्ज कराई है।

पुलिस के अनुसार  कांकेर से मलांजकुडुम जाने के मार्ग पर मर्रापी गांव के पास नक्सलियों ने 5 गाडिय़ों में आग लगा दी, जिसमें 1 जेसीबी, 2 मिक्सचर मशीन, 2 हाइवा हैं। सभी गाडिय़ां सडक़ निर्माण के काम में लगी हुई थीं। शुक्रवार दिनदहाड़े नक्सलियों ने इस घटना को अंजाम दिया है।

अक्सर नक्सली इस तरह की घटना को अंजाम देने के बाद मौके से फरार हो जाते हैं, लेकिन इस बार नक्सलियों ने ना सिर्फ गाडिय़ों में आग लगाई बल्कि उसका वीडियो भी बनाया।
 विदित हो कि 10 साल बाद क्षेत्र में नक्सलियों का आतंक मर्रापी से कलमुच्चे प्रधानमंत्री सडक़ योजना के तहत 3 किमी की सडक़ का निर्माण किया जा रहा था। ।

कलमुच्चे और मरका के लिए पहुंच मार्ग नहीं है। कलमुच्चे अगर किसी को जाना हो तो उसे कांकेर -आमाबेड़ा मार्ग में पडऩे वाला गांव गुमझिर जाना पड़ता है। वहां से कच्ची पथरीले सडक़ के रास्ते कलमुच्चे जाया जा सकता है, जिसकी जिला मुख्यालय से तकरीबन 30 किमी दूरी तय करना पड़ेगा। दूसरा रास्ता घने जंगल और पहाडिय़ों के रास्ते होते 10 किलोमीटर का रास्ता तय कर तुलतुली जाने के बाद एक पक्की सडक़ मिलेगी। जिसकी जिला मुख्यालय से दूरी तकरीब 25 किलोमीटर है, इसी कच्चे सडक़ का ग्रामीण आवागन के किए इस्तेमाल करते हैं।
        ग्रामीण बताते हंै कि इस गांव में सडक़ निर्माण के किए राजधानी जाकर पूर्व मुख्यमंत्री को आवेदन दे चुके हैं। जिले में विधायक, सांसद तक को फरियाद लगा चुके हैं, लेकिन कभी सडक़ नहीं बनी। अब सडक़ बन भी रही है तो नक्सली उसे बनने नहीं दे रहे हैं.। नक्सलियों के विराध के चलते अब यह सडक़ निर्माण फिर रुक गया है।

 


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