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'छत्तीसगढ़' संवाददाता
बिलासपुर, 5 मार्च। हाईकोर्ट ने एक सब-इंस्पेक्टर की याचिका पर निर्णय दिया है कि आपात् स्थिति में दूसरे राज्य के किसी अस्पताल में इलाज कराने पर भी सरकार उसका खर्च वहन करेगी, चाहे वह अस्पताल राज्य सरकार की सूची में शामिल हो या नहीं।
सन् 2020 में पंडरिया के सब इंस्पेक्टर संजीव कुमार ठाकुर का स्वास्थ्य अचानक तब बिगड़ गया जब वे पश्चिम बंगाल घूमने गये थे। उन्हें सिलीगुड़ी के एक अस्पताल में भर्ती होना पड़ा। 18 दिन वहां भर्ती रहने के बाद जब तबियत में सुधार हुआ तो बिलासपुर आये और यहां के किम्स चिकित्सालय में इलाज कराया।
यहां आने के बाद उन्होंने इलाज में हुए खर्च के लिये रिएम्बर्समेंट के लिये बिल के साथ आवेदन लगाया। विभाग ने ने किम्स के बिल का तो भुगतान कर दिया पर पश्चिम बंगाल में हुए 6 लाख 20 हजार रुपये देने से मना कर दिया। विभाग ने कहा कि राज्य सरकार की सूची में पश्चिम बंगाल का उक्त अस्पताल शामिल नहीं है। इसके विरुद्ध उन्होंने अपने अधिवक्ता के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका दायर की। याचिका में कहा गया कि आपात स्थिति में ऐसे अस्पतालों में भी इलाज करने की छूट है, जो राज्य सरकार की सूची में नहीं है। ऐसे बिल को स्वीकृत करना डीजीपी के अधिकार क्षेत्र में आता है।
जस्टिस संजय के अग्रवाल ने डीजीपी को सब-इंस्पेक्टर के आवेदन पर निर्णय लेने का आदेश दिया और कहा कि स्वास्थ्य सेवा संविधान के अनुच्छेद 21 के अंतर्गत मौलिक अधिकार है।


