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165 मनोरोगियों को अपने घर में अपनाने की उम्मीद, जस्टिस भादुड़ी ने लगाया जोर
05-Mar-2022 8:37 AM
165 मनोरोगियों को अपने घर में अपनाने की उम्मीद, जस्टिस भादुड़ी ने लगाया जोर

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

बिलासपुर, 4 मार्च। राज्य मानसिक चिकित्सालय में इलाज के बाद स्वस्थ हो चुके धमतरी के देवेंद्र हरजानी को उम्मीद है कि उसका भाई महेश उसे लेने के लिए आएगा।  उसे खबर की गई है लेकिन वह आ नहीं रहा, केवल आश्वासन दे रहा है।

बिलासपुर में छत्तीसगढ़ का एकमात्र राज्य मानसिक चिकित्सालय स्थित है। इसकी स्थापना एक जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद हाईकोर्ट के आदेश पर की गई थी। राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यकारी अध्यक्ष हाईकोर्ट के एक सीनियर जज होते हैं, जो यहां की व्यवस्थाओं की नियमित मॉनिटरिंग करते हैं। इस समय यह जिम्मेदारी राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यपालक अध्यक्ष जस्टिस गौतम भादुड़ी संभाल रहे हैं। उनके निर्देश पर प्राधिकरण के सचिव सिद्धार्थ अग्रवाल, अवर सचिव द्विजेंद्रनाथ ठाकुर और विधिक सहायता अधिकारी शशांक शेखर दुबे नियमित रूप से मानसिक चिकित्सालय और स्वस्थ हो चुके मरीजों के लिए बनाए गए हॉफ वे होम का निरीक्षण करते हैं। 
उन्होंने हाल के निरीक्षण में पाया कि धमतरी के देवेंद्र की ही तरह हॉफ वे होम में ऐसी 92 महिलाएं और 45 पुरुष हैं, जो स्वस्थ हो चुके हैं पर उनके परिवार के लोग वापस उन्हें घर ले जाने रुचि नहीं दिखा रहे हैं।

इन सभी को अपनों के बीच आशियाना मिले इसके लिए राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण लगातार कोशिश कर रहा है। यह कठिन काम है क्योंकि यहां भर्ती और स्वस्थ हो चुके लोग केवल छत्तीसगढ़ नहीं, बल्कि अलग-अलग राज्यों से हैं। इनके घर का पता ढूंढने और परिवार के लोगों से संपर्क करने की जिम्मेदारी प्राधिकरण ने ली है।

हाल ही में 28 ऐसे स्वस्थ हो चुके मनोरोगियों की सूची मानसिक चिकित्सालय से प्राधिकरण को मिली है, जिनके घर का पता चल गया है। प्राधिकरण उन्हें भी परिवार के पास पहुंचाने की कोशिश कर रहा है।

इनमें एक राजनांदगांव की हेमा बघेल को उनके परिवार वालों के पास पहुंचाया गया। इस मामले में भी परिजनों ने उसे घर लाने में रुचि नहीं दिखाई थी। प्राधिकरण ने समझाया और मां की सहमति से हेमा बघेल को घर छोड़ा गया।

मगर हर किसी के साथ ऐसा नहीं है। कवर्धा में रहने वाले उमेश यादव की तबीयत अब पूरी तरह ठीक है। वह अपनी मां को बहुत याद करता है। उसे चिंता है कि मां दूसरों के घरों में जाकर काम करती है। वह घर वापस जाना चाहता है लेकिन उसे कोई लेने नहीं आ रहा है। वह अपनी मां को सुखी रखने की इच्छा रखता है। चाहे इसके लिए मजदूरी ही क्यों ना करनी पड़े।


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