ताजा खबर
छत्तीसगढ़ संवाददाता
बिलासपुर, 4 मार्च। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक दंपती के बीच बच्चों का आपस में बंटवारा करने के समझौते के खिलाफ दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई पूरी करते हुए फैसला सुरक्षित रखा है।
रायपुर के निसिर भावे जेठी का यहीं की रहने वाली खुशबू जेठी से सन् 2011 में विवाह हुआ था। दोनों का एक बेटा और एक बेटी है। आपस में संबंध बिगड़ने पर उन्होंने तलाक लेने के लिये रजिस्ट्रार फर्म्स एंड सोसायटी के समक्ष आवेदन लगाया। रजिस्ट्रार ने दोनों की सहमति से एक अनुबंध पत्र तैयार कराया, जिसमें तय किया गया कि बेटी पिता के पास तथा बेटा मां के साथ रहेगा। पति-पत्नी 15-15 दिन में अपने बच्चों से मिल सकेंगे। जब महिला ने अपनी बेटी से मिलना चाहा तो उसके पति ने उससे नहीं मिलवाया। ऐसा कई बार होने पर पत्नी ने हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की। महिला ने कहा कि रजिस्ट्रार को इस तरह का समझौता कराने का अधिकार नहीं है। याचिका में इस अनुबंध को रद्द करने की मांग की गई। दूसरी ओर पति ने यह कहा कि बेटी गुजरात में पढ़ाई कर रही है, जिसके कारण वह उसे उसकी मां से नहीं मिलवा पाया है।
चीफ जस्टिस अरुप कुमार गोस्वामी और जस्टिस एन के चंद्रवंशी की बेंच ने मामले की सुनवाई कर फैसला सुरक्षित रखा है।


