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आदिवासी साहित्य में लोक परंपरा पर दो दिनी संगोष्ठी
24-Feb-2026 8:33 PM
आदिवासी साहित्य में लोक परंपरा पर दो दिनी संगोष्ठी

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
 खैरागढ़, 24 फरवरी।
‘आदिवासी साहित्य में लोक परंपरा’ विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय शोध संगोष्ठी में प्रो. राजन यादव विभागाध्यक्ष हिंदी एवं अधिष्ठाता कला संकाय इन्दिरा कला संगीत विश्वविद्यालय खैरागढ़ आमंत्रित हुए।
उच्च शिक्षा विभाग मध्यप्रदेश एवं शाह कुंवर रघुनाथ शाह शासकीय महाविद्यालय मेंहदवानी मप्र में आयोजित इस संगोष्ठी में विश्व प्रसिद्ध ललित निबंधकार प्रो. श्रीराम परिहार खंडवा, डॉ. लक्ष्मीकांत चंदेला अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय रीवा एवं प्रो. पी आर चंदेलकर अपर संचालक उच्च शिक्षा जबलपुर संभाग उपस्थित थे।
समापन समारोह के मुख्य अतिथि प्रो राजन यादव ने बताया कि भारत के सभी क्षेत्रों में जनजातीय जीवन का प्रतिनिधित्व करने वाले समुदाय बसे हुए हैं। इनके रीति रिवाज और रहन सहन में उस क्षेत्र की विशिष्टता की झलक ही इनकी पहचान का आधार है।
संथाल युद्ध के नायक बिरसा मुंडा एवं उनकी बहनों के बलिदान को भुलाया नहीं जा सकता। इस संगोष्ठी में अनेक महाविद्यालय के प्राचार्यों एवं अनेक प्रदेश के प्राध्यापकों एवं शोधार्थियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। संगोष्ठी के संयोजक डॉ. शशिकान्त चंदेला ने प्रो. राजन यादव को श्रीफल, शाल, प्रतीक चिन्ह एवं पुस्तक भेंट की ।


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