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लगन से की गई मेहनत असफल नहीं होती-राजा आर्यव्रत
21-Nov-2025 3:59 PM
लगन से की गई मेहनत असफल नहीं होती-राजा आर्यव्रत

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

खैरागढ़, 21 नवंबर। इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय खैरागढ़ द्वारा आयोजित तीन दिवसीय महोत्सव के दूसरे दिन कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विवि संस्थापक परिवार के  आर्यव्रत सिंह थे तथा अध्यक्षता कुलपति डॉ. लवली शर्मा ने की, वहीं बतौर विशिष्ट अतिथि मनीष पार्क समाजसेवी दुर्ग, अमित बरडिय़ा समाजसेवी राजनंदगांव तथा हरिश्चंद्र जैन समाज सेवी राजनंदगांव उपस्थित थे।

कार्यक्रम में  खैरागढ़ राज परिवार के आर्यव्रत ने कहा कि मेरे परदादा और परदादी राजा वीरेंद्र बहादुर सिंह एवं रानी पद्मावती देवी सिंह ने जिस उद्देश्य और जनता के लाभ के लिए अपना भव्य महल संगीत और कला की साधना के लिए दान में दिया, उसकी सार्थकता और महत्व को हम सबको मिलकर पूरी करनी होगी।

 आर्यव्रत सिंह ने आगे कहा कि जो छात्र-छात्राएं अपने को कला के क्षेत्र में स्थापित करना चाहते हैं उन्हें पूरी लगन से मेहनत करना होगा क्योंकि कला साधना का विषय है और लगन से की गई मेहनत कभी व्यर्थ नहीं जाता। हर चीज का अपना समय होता है और समय आने पर उसका प्रतिफल जरूर मिलता है।

उन्होंने आगे कहा कि विगत कुछ वर्षों से विश्वविद्यालय का विकास अवरुद्ध हो गया था किंतु नए कुलपति लवली शर्मा के आने से विकास की गाड़ी फिर से पटरी पर दौड़ चली है।

कुलपति प्रोफेसर डॉ. लवली शर्मा ने कहा कि कला एवं ललित कला को समर्पित एशिया प्रसिद्ध यह विश्वविद्यालय खैरागढ़ के राजा-रानी क ी सहृदयता और दानशीलता का परिणाम है। जिस महल में पूरा बचपन गुजारा हो और जहां बहुत सी खट्टी मीठी यादें हो उसे तिनके की भांति दान में दे देना बहुत ही महानता का परिचायक है। राजा रानी ने जिस मनसा और उद्देश्य से अपने महल को दान में दिया है हम उन उद्देश्यों की पूर्ति जरूर करेंगे। आपके द्वारा संगीत और कला की साधना के लिए दिए गए दान को कभी विस्मृति नहीं किया जा सकता। नगर के साथ-साथ देश के लोगों को खैरागढ़ में होने वाले महोत्सव का बेसब्री से इंतजार रहता है।

कुलपति ने आगे कहा कि इस अनूठे विश्वविद्यालय को केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा दिलाने हेतु प्रयास किया जा रहा है जिसके लिए 100 एकड़ जमीन होनी चाहिए। हम सब मिलकर इसे केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा दिलाने पुरजोर कोशिश करेंगे।

दूध मोगरा ने बटोरी तालियां

 खैरागढ़  महोत्सव के द्वितीय दिवस सांस्कृतिक कार्यक्रम के तहत सर्वप्रथम विश्वविद्यालय के संगीत संकाय के तांत्रिक विभाग द्वारा स्वर वाद्य वृन्द वादन प्रस्तुत किया गया जिसमें सितार ,सरोद, वायलिन बांसुरी का अद्भुत संतुलन एकाग्रता के साथ देखने को मिला। इसके पश्चात विश्वविद्यालय के ही अवनद्ध वाद्य विभाग के ही विद्यार्थियों द्वारा समूह वादन अवनद्ध कुतक प्रस्तुत किया गया।

 वहीं पंडित हरीश तिवारी दिल्ली का शास्त्रीय गायन, पंडित बुधादित्य मुखर्जी, कोलकोता का सितार वादन, व्योमेश शुक्ला का राम की शक्ति पूजा शीर्षक से नृत्य नाटिका प्रस्तुत किया गया जो आकर्षण का केंद्र रहा। अंत में 36 गढ़ की लोक संस्कृति आधारित कार्यक्रम दूध मोगरा डॉ. पीसी लाल यादव एवं समूह द्वारा प्रस्तुत किया गया जिसमें गीतों एवं नृत्य के माध्यम से छत्तीसगढ़ की कला, संस्कृति एवं धरोहर को प्रदर्शित किया गया। सांस्कृतिक कार्यक्रम का संचालन डॉक्टर राजन यादव, डॉ. देवमाइत मिंज, डॉ. लिकेश्वर वर्मा एवं डॉक्टर कौस्तुभ रंजन द्वारा किया गया।


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