अंतरराष्ट्रीय
ईरान ने एक और विवादास्पद कदम उठाते हुए तेहरान की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी के 29 वर्षीय छात्र एरफान शकूरजादेह को जासूसी के आरोप में फांसी दे दी. ईरानी न्यायपालिका की वेबसाइट मिजान के अनुसार, उसे अमेरिकी जासूसी एजेंसी सीआईए और इस्राएल की खुफिया एजेंसी मोसाद के साथ सहयोग करने का दोषी पाया गया था. अधिकारियों ने दावा किया कि वह सैटेलाइट तकनीक से जुड़ी संवेदनशील जानकारी विदेशी एजेंसियों को दे रहा था और उसके कथित "कबूलनामे" को राज्य टीवी पर प्रसारित करने की बात भी कही गई.
हालांकि, नॉर्वे स्थित मानवाधिकार संगठनों 'ईरान ह्यूमन राइट्स' (आईएचआर) और 'हेंगॉ' ने इस मामले को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं. उनके अनुसार शकूरजादेह एक प्रतिभाशाली छात्र था, जिसे महीनों तक एकांत कारावास में रखा गया और उसे शारीरिक तथा मानसिक यातनाएं दी गईं. संगठनों ने कहा कि उससे जबरन झूठे कबूलनामे लिए गए. फांसी से पहले अपने संदेश में शकूरजादेह ने आरोपों को "बेबुनियाद" बताते हुए कहा कि उसे यातना देकर कबूलनामा देने पर मजबूर किया गया.
यह घटना ऐसे समय में हुई है जब ईरान में हाल के महीनों में फांसी की सजा में तेजी आई है. फरवरी के अंत से शुरू हुए तनावपूर्ण माहौल के बाद जासूसी के आरोप में यह पांचवीं फांसी है. इसके अलावा, विरोध प्रदर्शनों और विपक्षी संगठनों से जुड़े कई लोगों को भी मौत की सजा दी गई है.
मानवाधिकार संगठनों का आरोप है कि ईरान इन सजाओं का इस्तेमाल समाज में डर का माहौल बनाने के लिए कर रहा है, जबकि देश पहले ही दुनिया में सबसे अधिक फांसी देने वाले देशों में शामिल है. एनजीओ का कहना है कि इस साल ईरान में अब तक 190 लोगों को फांसी दी गई है. (dw.com/hi)


