अंतरराष्ट्रीय
यूरोपीय आयोग के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, जर्मनी में पेट्रोल की कीमतों में यूरोपीय संघ (ईयू) के अन्य सदस्य देशों की तुलना में काफी अधिक वृद्धि दर्ज की गई है. 30 मार्च से 6 अप्रैल के बीच जर्मनी में पेट्रोल की कीमतें लगभग 11 सेंट प्रति लीटर बढ़ गईं. इसके विपरीत, जर्मनी के पड़ोसी देशों में कीमतों में केवल कुछ सेंट की बढ़ोतरी हुई, जबकि पोलैंड और ऑस्ट्रिया जैसे देशों में सरकारी हस्तक्षेप के बाद कीमतों में गिरावट देखी गई.
कीमतों में इस उछाल का समय जर्मनी में लागू किए गए एक नए कानून से मेल खाता है, जिसे "12 बजे का नियम" कहा जा रहा है. इस कानून के तहत गैस स्टेशनों को दिन में केवल एक बार, दोपहर 12 बजे ही अपनी कीमतें बढ़ाने की अनुमति है. यह नीति पड़ोसी देश ऑस्ट्रिया के मॉडल पर आधारित है. हालांकि, आलोचकों ने पहले ही चेतावनी दी थी कि इससे कीमतें घटने के बजाय बढ़ सकती हैं, क्योंकि पेट्रोल पंप मालिक बाद में कीमतें न बढ़ा पाने की भरपाई के लिए दोपहर 12 बजे ही बड़ी बढ़ोतरी कर सकते हैं.
जर्मनी के मोटर चालकों के संघ 'एडीएसी' के अनुसार, नए नियम के लागू होने के शुरुआती दिनों में ही देशभर में औसत कीमतों में 10 सेंट से अधिक की उछाल देखी गई. अर्थव्यवस्था मंत्रालय के प्रवक्ता ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अभी यह निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी कि नया कानून अपने उद्देश्य में सफल रहा है या नहीं. मध्य पूर्व में जारी युद्ध के कारण भी ईंधन की कीमतों पर वैश्विक दबाव बना हुआ है, जिससे स्थिति और अधिक जटिल हो गई है.


