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फ्रांस ने प्लान्ड ऑब्सोलेसेंस को अपराध घोषित किया: जानबूझकर उत्पादों की उम्र घटाने पर जेल और भारी जुर्माना
14-Feb-2026 12:24 PM
फ्रांस ने प्लान्ड ऑब्सोलेसेंस को अपराध घोषित किया: जानबूझकर उत्पादों की उम्र घटाने पर जेल और भारी जुर्माना

पेरिस, 14 फरवरी 2026: फ्रांस ने दुनिया में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए प्लान्ड ऑब्सोलेसेंस (योजनाबद्ध अप्रचलन) को औपचारिक रूप से अपराध घोषित कर दिया है। इसका मतलब है कि अब कोई भी कंपनी जानबूझकर अपने उत्पादों—जैसे मोबाइल फोन, लैपटॉप, घरेलू उपकरण, बैटरी, प्रिंटर या अन्य इलेक्ट्रॉनिक सामान—की उम्र या दक्षता को कम करने की कोशिश नहीं कर सकेगी। ऐसा करने पर कंपनियों को 2 साल तक की जेल और 3 लाख यूरो (लगभग 2.7 करोड़ रुपये) तक का जुर्माना हो सकता है। अगर कंपनी की औसत वार्षिक आय ज्यादा है, तो जुर्माना उसकी 5% सालाना कमाई तक बढ़ सकता है।

फ्रांसीसी पर्यावरण मंत्रालय और ऊर्जा परिवर्तन मंत्रालय ने इस कानून को "ऊर्जा परिवर्तन और हरित विकास के लिए कानून" (Law on Energy Transition for Green Growth) के तहत लागू किया है। यह कानून जर्नल ऑफिसियल डे ला रिपुब्लिक फ्रेंचेज़ में प्रकाशित हो चुका है।

प्लान्ड ऑब्सोलेसेंस क्या है?
यह वह प्रथा है जिसमें कंपनियां जानबूझकर उत्पादों को कमजोर बनाती हैं ताकि ग्राहक जल्दी नया सामान खरीदें। उदाहरण:

स्मार्टफोन में सॉफ्टवेयर अपडेट से पुरानी बैटरी धीमी हो जाती है।
प्रिंटर में सस्ती स्याही कार्ट्रिज को ब्लॉक कर देना।
बैटरी को ऐसे डिजाइन करना कि 2-3 साल में ही 50% क्षमता खो जाए।
लैपटॉप में पार्ट्स को गोंद से चिपकाना ताकि रिपेयर न हो सके।
फ्रांस ने इसे अपराध माना है क्योंकि इससे उपभोक्ताओं का पैसा बर्बाद होता है और पर्यावरण पर बोझ बढ़ता है—हर साल करोड़ों टन इलेक्ट्रॉनिक कचरा (e-waste) पैदा होता है।

दुनिया की कंपनियां कितनी दोषी मानी जाती हैं?
दुनिया भर में कई बड़ी कंपनियां इस प्रथा के लिए दोषी ठहराई जा चुकी हैं या जांच के दायरे में हैं। कुछ प्रमुख उदाहरण:

एप्पल: 2017-18 में "बैटरी गेट" विवाद में फंस गई। पुराने iPhone में सॉफ्टवेयर अपडेट से परफॉर्मेंस कम कर दी गई। अमेरिका और यूरोप में मुकदमे हुए, एप्पल को 5 करोड़ डॉलर से ज्यादा जुर्माना भरना पड़ा।
सैमसंग: कुछ मॉडल में बैटरी जल्दी खराब होने की शिकायतें।
ह्यूलेट-पैकार्ड (HP): प्रिंटर में सस्ती स्याही कार्ट्रिज को ब्लॉक करने के आरोप।
जॉन डियर: ट्रैक्टरों में सॉफ्टवेयर लॉक से किसानों को रिपेयर करने से रोका जाता है।
फेयरफोन और अन्य: कई छोटी कंपनियां "राइट टू रिपेयर" का समर्थन करती हैं, लेकिन बड़ी कंपनियां इसका विरोध करती रही हैं।
फ्रांस का कानून अब इन सब पर नकेल कस रहा है। इसमें हार्डवेयर लिमिटेशन (जानबूझकर कमजोर पार्ट्स) और सॉफ्टवेयर स्लोडाउन (अपडेट से धीमा करना) दोनों शामिल हैं।

कानून का महत्व और प्रभाव
फ्रांस ने "राइट टू रिपेयर" आंदोलन को मजबूती दी है। अब उपभोक्ता आसानी से मरम्मत करवा सकेंगे, न कि नया सामान खरीदना पड़ेगा। इससे इलेक्ट्रॉनिक कचरा कम होगा और पर्यावरण को फायदा होगा। यह कानून वैश्विक स्तर पर मिसाल बन सकता है—अन्य यूरोपीय देश (जैसे जर्मनी, नीदरलैंड) और भारत जैसे देश भी इसी दिशा में सोच रहे हैं।

फ्रांस के पर्यावरण मंत्री ने कहा: "यह कानून उपभोक्ता धोखाधड़ी के खिलाफ है और सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा देता है।" अब टेक कंपनियों को टिकाऊ और लंबे समय तक चलने वाले उत्पाद बनाने होंगे।

यह कदम दुनिया में "डिस्पोजेबल कल्चर" (फेंकने वाली संस्कृति) को रोकने की दिशा में एक बड़ा कदम है।


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