अंतरराष्ट्रीय
बांग्लादेश की पीएम शेख़ हसीना के देश छोड़ कर चले जाने पर वहां के अख़बारों ने अलग-अलग नज़रिये से टिप्पणी की है.
दैनिक 'प्रोथोम आलो' की ख़बर का शीर्षक है- शेख़ हसीना अंत में भी बल प्रयोग करना चाहती थीं.
अख़बार लिखता है कि शेख हसीना अंत में भी अतिरिक्त बल और अधिक रक्तपात के जरिए सत्ता बरकरार रखना चाहती थीं.
'सामयिक' पत्रिका की हेडलाइन है- छात्रों की खून से सनी जीत.
इसमें कहा गया है कि बांग्लादेश में जनता की जीत हुई लेकिन ये छात्रों के खून से सनी हुई है.
'न्यू एज' की ख़बर कुछ इस तरह शुरू होती है- खालिदा की रिहाई, जेएस का विघटन, राष्ट्रीय सरकार जल्द
पहले पन्ने पर लगी इस रिपोर्ट के अनुसार, पार्टी के महासचिव मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर ने कहा है कि बीएनपी चेयरपर्सन खालिदा जिया को तुरंत रिहा करने का फैसला किया गया है.
'नया दिगंत' अखबार में बांग्लादेश ग्रामीण बैंक के संस्थापक मोहम्मद यूनुस के हवाले से कहा गया है कि छात्रों की जीत दूसरी आज़ादी है.
जीत के दिन पुलिस फायरिंग में 103 की मौत - युगांतर अखबार के पहले पन्ने पर ये ख़बर छापी गई है.
इसमें लिखा गया है कि प्रधानमंत्री शेख हसीना के सोमवार को इस्तीफा देने के बाद अवामी लीग के मंत्रियों-सांसदों के आवास, केंद्रीय कार्यालय और अन्य कार्यालयों में तोड़फोड़ की गई और आगजनी की गई.
बांग्लादेश
'‘बिजनेस स्टैंडर्ड'' ने लिखा कर्फ्यू आज ख़त्म; सभी शैक्षणिक, निजी संस्थान, कारखाने भी खुलेंगे. यह बिजनेस स्टैंडर्ड के पहले पन्ने का शीर्षक है. (bbc.com/hindi)


