गरियाबंद
राजिम कुंभ कल्प
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
राजिम, 13 फरवरी। राजिम कुंभ कल्प के मुख्य मंच पर बारवें दिन आयोजित सुनील नाइट ने मेले की सांस्कृतिक संध्या को ऐतिहासिक बना दिया। जैसे ही मंच पर छत्तीसगढ़ के लोकप्रिय गायक सुनील सोनी ने कदम रखा, पूरा पंडाल तालियों और जयकारों से गूंज उठा। कार्यक्रम की शुरुआत उन्होंने भक्तिमय गीत हे गणेश गौरी के ललना से की, जिसने माहौल को श्रद्धा और आस्था से भर दिया। इसके बाद हर-हर भोला की अनोखी प्रस्तुति ने दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया। उनकी सधी हुई आवाज़, संगीत की नई धुन ने श्रोताओं का दिल जीत लिया।
जब उन्होंने वर्ष 2000 की चर्चित छत्तीसगढ़ी फिल्म मोर छईया भुईया का भावुक गीत छईया भुईया ल छोड़ जावईया प्रस्तुत किया, तो कई दर्शकों की आंखें नम हो गईं। वहीं मीठ-मीठ लागे मया के बानी, रानी के फुंदरा राजा गहना धरे और तारा तोड़ के लाना गोरी जैसे लोकप्रिय गीतों ने माहौल को पूरी तरह रंगीन बना दिया। दर्शक दीर्घा खचाखच भरी रही और लोग देर रात तक अपने स्थान पर डटे रहे। कई लोग मंच के सामने आकर झूमते और मोबाइल में प्रस्तुति कैद करते नजर आए।
कार्यक्रम का आनंद लेने के लिए राजिम विधायक रोहित साहू तथा अभनपुर विधायक इंद्र कुमार साहू, गरियाबंद जिला पंचायत अध्यक्ष गौरीशंकर कश्यप सहित अन्य जनप्रतिनिधि भी मुख्य मंच पर मौजूद रहे। जनप्रतिनिधियों ने पूरे कार्यक्रम के दौरान दर्शकों के बीच बैठकर प्रस्तुतियों का लुत्फ उठाया। छत्तीसगढ़ी गीतों और भक्तिमय धुनों पर वे भी तालियों की गूंज के साथ कलाकारों का उत्साहवर्धन किया। मंच पर अन्य कार्यक्रमों में कत्थक नृत्यांगना शिल्पा सिंह की आकर्षक प्रस्तुति दी।
पैरों, हाथों और आंखों के बेहतरीन तालमेल ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इसके बाद सुरसुधा परिवार के संतोष कुमार घोरबंधे ने भक्तिमय प्रस्तुतियों से माहौल को आध्यात्मिक बना दिया। तोला बुलाव जगदम्बा अम्बे भवानी और मैं लइका गवई किसान के जैसे गीतों ने दर्शकों को भक्ति रस में डुबो दिया। पंथी नृत्य सतनाम गंगा बोहागे गा छत्तीसगढ़ के माटी म के माध्यम से गुरु घासीदास बाबा के संदेशों को याद किया गया। देशभक्ति गीत ये मोर वतन जेनला कहिथन भारत देश गा ने वातावरण को राष्ट्रभक्ति से सराबोर कर दिया।
कलाकारों का सम्मान विधायक रोहित साहू, विधायक इंद्र कुमार साहू सहित अन्य जनप्रतिनिधियों एवं प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा स्मृति चिन्ह और बुके भेंट कर किया गया। संचालन दुर्गेश तिवारी और किशोर निर्मलकर ने किया।


