गरियाबंद
राजगोंड समाज का ऐतिहासिक फैसला निकाली जागरूकता रैली
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
मैनपुर, 19 जनवरी। राजगोंड समाज के 10 गांवों की संयुक्त बैठक में नशा मुक्ति अभियान चलाने का निर्णय लिया गया। इसी निर्णय के तहत 17 जनवरी को समाज की ओर से एक जन जागरूकता रैली आयोजित की गई। रैली मंदाग मूडा से प्रारंभ होकर बुडगेल टप्पा तक निकाली गई।
रैली में समाज के पुरुषों और महिलाओं ने भाग लिया। बाइक रैली और अन्य वाहनों के माध्यम से प्रतिभागी नशा मुक्ति से जुड़े संदेश देते हुए क्षेत्र में भ्रमण करते नजर आए। रैली के माध्यम से लोगों को नशे के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करने का प्रयास किया गया।
समाज के पदाधिकारियों के अनुसार, रैली के दौरान उन स्थानों पर भी प्रतिनिधि पहुंचे, जहां देसी शराब बनाए जाने की सूचना मिलने की बात कही गई थी। समाज की ओर से संबंधित लोगों को नशा न करने और शराब निर्माण न करने का आग्रह किया गया।
समाज द्वारा लिए गए निर्णय के अनुसार, शराब पीने या बनाने वालों पर सामाजिक स्तर पर प्रतिबंध लगाए जाने का प्रावधान किया गया है। निर्णय में यह भी कहा गया है कि ऐसे लोगों को सामाजिक कार्यक्रमों में शामिल नहीं किया जाएगा और उनसे वैवाहिक संबंध नहीं रखे जाएंगे। साथ ही समाज ने शिक्षा और रोजगार को प्राथमिकता देने का संकल्प भी लिया है।
समाज के सचिव लुदर पाथर ने कहा कि उनके अनुसार नशे के कारण समाज के विकास पर प्रभाव पड़ रहा है। इसी वजह से नशा मुक्ति अभियान शुरू किया गया है।
समाज के कोषाध्यक्ष विजय मरकाम ने अपने वक्तव्य में कहा कि उनके मत में आज़ादी के बाद देसी शराब बनाने से संबंधित छूट से आदिवासी समाज को नुकसान पहुंचा है। उन्होंने कहा कि समाज ने नशे से दूर रहकर आगे बढऩे का निर्णय लिया है। समाज की महिला सदस्य श्रुति सिंह ध्रुवा ने कहा कि उनके अनुसार सडक़ दुर्घटनाओं का एक कारण नशा भी है। उन्होंने बताया कि समाज ने शराब बनाने वालों से सामाजिक संपर्क न रखने का निर्णय लिया है।
पूर्व ग्रुप अध्यक्ष इंद्र माझी ने कहा कि उनके विचार से यह निर्णय समाज को दिशा देगा और यदि लोग शिक्षा व रोजगार पर ध्यान दें, तो समाज आगे बढ़ सकता है।
इस पहल को लेकर क्षेत्र के अन्य समाजों की ओर से भी प्रतिक्रिया सामने आई है। कुछ सामाजिक प्रतिनिधियों ने इसे नशा मुक्ति की दिशा में एक उदाहरण बताया है।


