दुर्ग
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
दुर्ग, 15 मई। छत्तीसगढ़ कृषि महाविद्यालय, धनौरा की बीएससी कृषि चतुर्थ वर्ष की छात्रा श्वेता बिंझलेकर द्वारा कृषि पत्रकारिता और व्यवहार कौशल विषय के अंतर्गत अरविंद यादव से मुलाक़ात कर एक सफल डेयरी संचालित करने के महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त करने का प्रयास किया क्योंकि भारत में पशु पालन किसानों की आमदनी बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण स्त्रोत है। अरविंद की डेयरी फार्म बोरसी, तालपुरी में स्थित है। यादव ने बताया कि यह उनका पारिवारिक व्यवसाय है।
यह व्यवसाय पिछले कई पीढ़ी दर पीढ़ी चलता आ रहा है और वर्तमान में भी निरंतर संचालित हो रहा है। इस डेयरी में लगभग 30 डिसमिल के क्षेत्र पर करीब 100 पशु पाले जाते हैं। इनमें 70 भैंसें और 30 गायें शामिल हैं। भैंसों की नस्ल मुख्यत: पंजाब की है, जबकि गायों में जर्सी, साहीवाल और देशी नस्लें पाई जाती हैं। भैंसें 2 से 12 लीटर तथा गायें 12 लीटर से अधिक दूध देती हैं।
यहाँ उत्पादित दूध होटल और अन्य स्थानों जैसे स्थानीय जरूरत मंद लोगों को बेचा जाता है, जिससे अच्छी आय प्राप्त होती है। पशुओं को राहड़ चूरी, लकड़ी चूरी, बिनौला खली, नाखिस तथा चोकर/भूसा जैसे संतुलित आहार दिए जाते हैं। उन्हें दिन में तीन बार भोजन और नियमित स्नान कराया जाता है। स्वच्छ और स्टैंडर्ड साइज के शेड की व्यवस्था रखी गई है और समय-समय पर डॉक्टर द्वारा जांच व टीकाकरण किया जाता है। पशुओं में मुंह-खुर रोग, लम्पी स्किन रोग, बुखार व कृमि जैसी बीमारियों का उपचार भी किया जाता है।
एक भैंस की कीमत लगभग 2,70,000 रुपये और एक गाय की कीमत 70,000 से 1,00,000 रुपये तक होती है। चारा महंगा होने के बावजूद इस व्यवसाय से लगभग 30 फीसदी वार्षिक लाभ प्राप्त होता है। इसके अलावा, गोबर और गोमूत्र को भी बाजार में बेचकर अतिरिक्त आय अर्जित की जाती है। इस प्रकार, बोरसी, तालपुरी स्थित यह डेयरी फार्म सही प्रबंधन और देखभाल के साथ एक लाभकारी एवं प्रेरणादायक व्यवसाय आज के युवाओं के लिए अच्छा उदाहरण प्रस्तुत करता है कि वो भी इस व्यवसाय से जुडक़र अपना स्वयं का रोजगार स्थापित कर सकते है।


