दुर्ग
10 मंडलों में बनी ‘समांतर’ कार्यकारिणी
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
भिलाई नगर, 20 अप्रैल। भारतीय जनता पार्टी जिला भिलाई में गुटबाजी और असंतोष का ज्वालामुखी फूट पड़ा है। भारतीय जनता युवा मोर्चा के जिलाध्यक्ष सौरभ जायसवाल द्वारा कल रात घोषित की गई 13 मंडलों की कार्यकारिणी को भाजपा मंडल अध्यक्षों ने सीधे तौर पर चुनौती दे दी है।
पैनल को दरकिनार करने का आरोप
सूत्रों के अनुसार, संगठन की परंपरा के मुताबिक भाजपा के सभी 13 मंडल अध्यक्षों से युवा मोर्चा के पदाधिकारियों के लिए नाम मंगाए गए थे। कार्यकर्ताओं का आरोप है कि जिलाध्यक्ष सौरभ जायसवाल ने उन नामों को ठंडे बस्ते में डाल दिया और प्रदेश नेतृत्व को अपनी पसंद के नाम भेज दिए। कल रात जैसे ही सूची सार्वजनिक हुई, पूरे जिले में बवाल मच गया।
निष्क्रिय और दागी चेहरों को मिली जगह-आरोप
कार्यकर्ताओं और मंडल अध्यक्षों का साफ कहना है कि घोषित सूची में शामिल अधिकांश नाम संगठन की गतिविधियों में कभी सक्रिय नहीं रहे। चर्चा तो यहां तक है कि कुछ पदाधिकारियों पर आपराधिक मामले भी दर्ज हैं। इससे जमीनी स्तर पर काम करने वाले निष्ठावान युवाओं में भारी आक्रोश देखा जा रहा है।
तेरह में से 10 मंडलों में ‘पैरेलल’ नियुक्तियां
घोषित पदाधिकारियों पर मचे घमासान के बीच आज सुबह एक अभूतपूर्व स्थिति देखने को मिली। भिलाई-चरौदा, कोहका, वैशाली नगर, सुपेला, कैम्प, पूरब, पश्चिम, जामुल, खुर्सीपार और कुम्हारी के भाजपा मंडल अध्यक्षों ने अपनी-अपनी सूची जारी कर दी। इन 10 मंडलों ने अपने द्वारा चयनित नामों को ही अधिकृत बताया है।
वर्तमान में इन मंडलों में भाजयुमो के 2-2 अध्यक्ष और 4-4 महामंत्री के नाम सामने आ चुके हैं, जिससे असमंजस की स्थिति बन गई है। केवल मुरमुंदा, जेवरा सिरसा और अहिवारा में फिलहाल समांतर सूची जारी नहीं हुई है।
सक्रिय टीम चाहिए - मंडल अध्यक्ष
घोषित युवा मोर्चा पदाधिकारियों पर भाजपा के असंतुष्ट मंडल अध्यक्षों ने स्पष्ट कहा कि हमें अपने मंडल में काम करने के लिए सक्रिय टीम चाहिए। जिन नामों की घोषणा जिलाध्यक्ष ने की है, उन्हें हम जानते तक नहीं। हमने जो पैनल दिया था, उसे पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया।
जिम्मेदार पदाधिकारी मौन
इस पूरे घटनाक्रम पर पक्ष जानने के लिए जब भाजयुमो जिलाध्यक्ष सौरभ जायसवाल से ‘छत्तीसगढ़’ ने संपर्क करने की कोशिश की गई, तो उनका फोन बंद मिला। वहीं, भाजपा जिलाध्यक्ष पुरषोत्तम देवांगन का फोन भी बंद है। बताया जा रहा है कि कल रात अचानक उनकी तबीयत बिगडऩे के कारण वे आराम कर रहे हैं।
भाजपा के एक जिला पदाधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि लोकतंत्र में संगठन की मजबूती नीचे से ऊपर की ओर जाने वाले फीडबैक पर टिकी होती है। जब मंडल अध्यक्षों से पैनल मंगाया गया तो यह एक लोकतांत्रिक प्रक्रिया थी। लेकिन जब उस पैनल को कूड़ेदान के हवाले कर बंद कमरों और खास बंगलों से नाम तय किए गए तो नाराजगी बढ़ सकती है।


