दुर्ग
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
उतई, 13 मार्च। दुर्ग जिले में ‘जल जीवन मिशन’ के तहत स्वीकृत समूह जल प्रदाय योजनाओं की प्रगति को लेकर सवाल उठ रहे हैं। लगभग 97 करोड़ की लागत वाली तीन योजनाओं के बावजूद कई गांवों में अब तक नल-जल आपूर्ति शुरू नहीं होने की बात सामने आई है। गर्मी के मौसम की शुरुआत के साथ ही ग्रामीणों में पानी की समस्या को लेकर चिंता बढ़ रही है।
लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (पीएचई) के अनुसार जिले में तीन समूह जल प्रदाय योजनाओं को प्रशासकीय स्वीकृति दी गई है। इनमें जेवरा सिरसा खुर्द-भटगांव समूह जल योजना (लगभग 25.80 करोड़), निकुम समूह जल योजना (लगभग 26.29 करोड़) और चंदखुरी-कोलिहापुरी-पिसेगांव समूह जल योजना (लगभग 45.07 करोड़) शामिल हैं। इन तीनों योजनाओं की कुल स्वीकृत लागत लगभग 97.18 करोड़ बताई गई है।
बताया गया कि जेवरा सिरसा खुर्द-भटगांव योजना का कार्य मेसर्स उमंग इंफ्रास्ट्रक्चर को 29 सितंबर 2023 को दिया गया था। इसी प्रकार निकुम समूह योजना का कार्य आर्यन कंस्ट्रक्शन, बिलासपुर को तथा चंदखुरी-कोलिहापुरी-पिसेगांव योजना का कार्य मेसर्स भवानी बोरवेल्स, जांजगीर-चांपा को 6 अक्टूबर 2023 को सौंपा गया था। इसके बावजूद कई स्थानों पर अब तक नल कनेक्शन शुरू नहीं होने की जानकारी सामने आई है।
इस मुद्दे को लेकर आयोजित एक बैठक में जनपद सदस्य ढालेश साहू ने लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब ठेकेदारों को 2023 में ही कार्य आदेश जारी कर दिए गए थे, तो वर्ष 2026 तक भी ग्रामीणों को पानी उपलब्ध क्यों नहीं हो पाया। उन्होंने कहा कि यदि योजनाओं पर करोड़ों रुपये स्वीकृत हुए हैं, तो इसका लाभ ग्रामीणों तक पहुंचना चाहिए।
बैठक में उपस्थित कुछ ग्रामीण महिलाओं ने कहा कि कई स्थानों पर पाइपलाइन बिछाने के लिए गलियों को खोद दिया गया है, लेकिन काम पूरा नहीं हुआ, जिससे आवागमन में भी परेशानी हो रही है।
जनपद सदस्य ढालेश साहू ने प्रशासन से योजनाओं की समीक्षा कर कार्यों को शीघ्र पूरा कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि यदि 15 दिनों के भीतर योजनाओं की प्रगति में सुधार नहीं होता, तो ग्रामीणों और हितग्राहियों के साथ मिलकर जिला मुख्यालय में आंदोलन किया जाएगा।


