दन्तेवाड़ा

मानसून में देरी, धान की बुवाई पिछड़ी
17-Jun-2026 10:48 PM
मानसून में देरी, धान की बुवाई पिछड़ी

-सुशील राठौर

दंतेवाड़ा, 17 जून (‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता)। दंतेवाड़ा में खरीफ धान की बुवाई अब तक पिछड़ी हुई है। जिससे धान की खेती पर प्रतिकूल प्रभाव पडऩे की आशंका है।

मध्य जून से पहले मानसूनी बारिश के पूर्वानुमान के बावजूद प्रचंड गर्मी पड़ रही है। जिससे खेतों की मिट्टी में नमी का अभाव है। इसके फलस्वरुप बुवाई में देरी हो चुकी है। वहीं जिन किसानों द्वारा बुवाई कर ली गई है, उन्हें पर्याप्त नमी के अभाव में बीज खराब होने की आशंका है।

इस साल खरीफ सीजन के शुरुआती दौर में ही किसानों को कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। विगत सप्ताह में पेट्रोल पंपों में डीजल नहीं मिलने की वजह से किसान अपने खेतों की जोताई नहीं कर पा रहे हैं। इस वजह से खेत की जुताई नहीं हो रही है।

 दंतेवाड़ा जिले में करीब 40 हजार हेक्टेयर में धान की खेती की जाती है। डीजल की किल्लत के बीच मौसम भी दगा दे रहा है। छत्तीसगढ़ में 10 से 16 जून तक मानसून के आने की मौसम विभाग ने संभावना व्यक्त की थी।

बारसूर इलाके में 10 को मध्यम बारिश हुई। लेकिन इसके बाद लगातार गर्मी पड़ रही है। ऐसे किसान जिन्होंने धान की बुवाई कर ली है, उन्हें नुकसान का खतरा है। बीज को अंकुरित होने के लिए पर्याप्त मात्रा में नमी का अभाव देखा जा रहा है।

बारसूर निवासी, थलेश ठाकुर ने बताया कि तेल संकट के कारण ट्रैक्टर जुताई के लिए नहीं मिल रहे हैं। भीषण गर्मी की वजह से भी धान की बुवाई में विलंब हो चुका है। दस जून के बाद जिन किसानों ने बुवाई कर ली है, अब उन्हें बीज खराब होने की चिंता सता रही है। खेतों में पर्याप्त मात्रा में नमी नहीं है। ऐसे में धान के बीज का समुचित ढंग से अंकुरण नहीं हो पाएगा। मुचनार, बारसूर, उपेट, भटपाल, छिंदनार और चेरपाल आदि कई गांवों में बुवाई का कार्य नहीं हो सका है।

कुआकोण्डा में बुवाई पीछे

जिले के कुआकोण्डा विकासखंड अंतर्गत अधिकांश खेतों में धान की बुवाई नहीं हो सकी है। इसका मुख्य कारण प्रचंड गर्मी पडऩा माना जा रहा है। ग्राम कुआकोण्डा के किसानों द्वारा बताया गया कि वर्तमान में खेतों की मिट्टी इतनी सख्त है कि जोताई नहीं हो पा रही है। इस समय अच्छी बारिश की आवश्यकता है।

बुवाई पर प्रतिकूल असर

इस संबंध में उपसंचालक कृषि सूरज पंसारी ने बताया कि जिले में अब तक 18417 हेक्टेयर में धान की बोवाई हो चुकी है। इसमें कटेकल्याण और कुआकोण्डा क्षेत्र शामिल है।

दंतेवाड़ा और गीदम में धान की बोवाई पीछे हो चुकी है। उन्होंने कहा कि इस अवधि तक करीब 26 हजार हेक्टेयर में धान की बुवाई हो जानी चाहिए थी। आगामी सप्ताह में बारिश होने पर धान की बोवाई में तेजी की संभावना है।


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