रैली निकालकर वन परिक्षेत्र अरसीकन्हार घेरा, पुलिस के साथ झूमा झपटी
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
नगरी, 14 मार्च। कल वन संघर्ष समिति बेलर बाहरा के बैनर तले दर्जन भर गांव के सैकड़ों ग्रामीणों ने वन परिक्षेत्र अरसीकन्हार के कार्यालय का घेराव किया गया। ग्रामीणों का आरोप है कि वन परिक्षेत्र अधिकारी देवदत तारम के द्वारा ग्रामीणों को झूठे आरोप में केस बनाकर फंसाया जा रहा है और उन्हें न्यायालीन प्रक्रिया में धकेला जा रहा है और भोले भाले आदिवासियों को प्रताडि़त किया जा रहा है। गुस्साए ग्रामीणों ने बस स्टैंड सांकरा से रैली निकालकर रेंजर के खिलाफ नारे लगाते हुए घेराव किया।
फॉरेस्ट गेट के पास घेराव के दरमियान पुलिस और ग्रामीणों में झूमा झपटी भी हुई और ग्रामीण फॉरेस्ट ऑफिस के गेट को तोडक़र अंदर घुसने में सफल हुए। पंद्रह दिन में कार्रवाई करने का आश्वासन के बाद ग्रामीण शांत हुए, लेकिन भविष्य में उग्र आंदोलन की चेतावनी भी दिया गया है ।
इस संबंध में जगदीश प्रसाद दर्रो एसडीओ उदंती सीतानदी टाईगर रिजर्व गरियाबंद ने कहा कि आज धरना प्रदर्शन किया गया जो ज्ञापन में उल्लेखित है। उस पर यथाशीघ्र कार्रवाई की जाएगी।
मामला एक हफ्ते पहले का है, जहा वन परिक्षेत्र अधिकारी के द्वारा उदंती अंतर्गत सोंढूर डैम से मछली पकड़ते ग्रामीणों को पकड़ा और दो बाइक को राजसात की कार्यवाही की गई।
जिस पर ग्रामीणों का आरोप है कि मछली पकडऩे वाले ओडिशा के व्यापारी को विभाग द्वारा संरक्षण दिया जाता है। ओडिशा के लोग उसी डैम में मछली पकड़ कर लाखों रुपए की कमाई करते हैं, अभ्यारण क्षेत्र के नदी से रेत की चोरी रेत माफियाओं द्वारा खुले रूप से की जाती है। उनके ऊपर कार्रवाई नहीं कर उनको संरक्षण प्रदान किया जाता है। ऐसे कर्मचारियों के ऊपर में कार्रवाई करने के बजाए, वहीं निवासरत ग्रामीणों को प्रताडि़त किया जाता है।
फिलहाल, ग्रामीणों के बिंदुवार मांगों पर विभाग ने पंद्रह दिन के भीतर कार्रवाई करने का आश्वासन दिया गया, तब जाकर गुस्साए ग्रामीणों ने धरना समाप्त किया, वहीं ग्रामीणों की माने तो मांगे पूरी नहीं होने पर डीएफओ कार्यलाय का घेराव किया जाएगा ।
इस संबंध में ग्रामीण नरेश मांझी अध्यक्ष किसान संघर्ष समिति बेलरबाहरा का कहना है कि वे वन क्षेत्र में रहते हैं व वन अधिनियम के कानून से भी अवगत है, जहां त्योहार के चलते ग्रामीण वन क्षेत्र में जाकर डैम के क्षेत्र में मछली पकड़ रहे थे, जिस पर कार्रवाई की गई। आरोप लगाया कि वन विभाग के अधिकारी का अडिय़ल रवैया है, जहां आज परिक्षेत्र अधिकारी खुद अवैध मछली के कारोबार में लिप्त है, जिनका ओडिशा के व्यापारियों के साथ साठगांठ है। ओडिशा के व्यापारी अभ्यारण्य क्षेत्र में रोजाना आते हैं और कई क्विंटल मछली रोजाना ले कर जा रहे। जिससे शासन को राजस्व का लाखों का नुकसान हो रहा है, जहां परिक्षेत्र अधिकारी को मालूम होने के बावजूद कार्रवाई नहीं करते।
श्रीधन सोम सरपंच ग्राम पंचायत ठेनही ने आरोप लगाते कहा है कि परिक्षेत्र अधिकारी जनप्रतिनिधियों का फोन कॉल रिसिव नहीं करता है। वनांचल में बसे ग्रामीणों को धमकी देता है, जेल में डाल दूंगा, पीओआर काटूंगा, जबकि स्वयं निर्माण कार्य को वन अधिनियम के विरूद्ध करता है, ऐसे अधिकारी के उपर कार्रवाई कर तत्काल यहां से हटाया जाए।
ग्रामीणों ने लगाए कई आरोप
ओडिशा के लोग रोज उसी बांध से रोज मछली मार कर ले जाते हैं, उस पर वन विभाग कार्रवाई क्यों नहीं करता। अभ्यारण क्षेत्र के नदियों से ठेकेदारों द्वारा रेत का अवैध उत्खनन किया जाता है जिस पर कार्रवाई नहीं की जाती। अभ्यारण क्षेत्र में मोबाइल टावर लगाने पर रोक पेशा क्षेत्र में बिना सर्च वारंट के एवं बिना ग्रामसभा के अनुमति बगैर ग्राम के आबादी क्षेत्र में घर में लगे खेत में घुसकर ग्रामीणों को प्रताडि़त करना विभिन्न निर्माण कार्य की मंजूरी बकाया राशि जल्द से जल्द प्रदान करें।
एक गंभीर आरोप लगाया गया कि वन विभाग द्वारा निर्माणाधीन बिल्डिंग में दरवाजा खिडक़ी बनाने के नाम पर स्वयं जंगल में लकड़ी की कटाई ग्रामीणों से कराई गई फिर ग्रामीणों द्वारा खिडक़ी दरवाजा निर्माण किया गया जिसके पैसे के लिए विभाग के पास पहुंचे तो ग्रामीणों के ऊपर लकड़ी चोरी की कार्रवाई की गई।
लगभग 11 गांव के ग्रामीण जन आंदोलन करने पहुंचे थे-बसीन, बोइरगांव,मेचका, बेलरबहारा, बरपदर, अर्जुनी, तुमड़ीबहार, गाताभर्री, दौड़ पंडरीपानी, ठेनहीं, गोबरा सीतानदी उदन्ती अभ्यारण्य के अरसीकन्हार रेन्ज मे सोन्ढूर डैम आता है जहां डैम के मुख्य गेट मे स्पष्ट लिखा है कि यह डैम अभ्यारण्य क्षेत्र के डुबान क्षेत्र में आता है जहां मतस्याखेट कानूनन अपराध है अगर यहां डुबान क्षेत्र में मछली मारते हुए पकड़े जाने पर वन अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी। दुर्भाग्य है कि सूचना पटल सिर्फ दिखावे के लिए है। वन विभाग मछली चोरी पर अब तक ठोस कार्रवाई करने में दिलचस्पी नहीं दिखाई है।
इस आंदोलन में शामिल थे बेलरबाहरा, ठेनही,दौडपंडरीपानी, मेचका, अरसीकन्हार,बासिन , बोईरगांव, अर्जुनी, तुमड़ीबाहर , गाताबाहर, सहित ग्यारह गांव के ग्रामीणों में इस मामले को लेकर काफी रोष है। पंद्रह दिन में कार्रवाई करने का आश्वासन के बाद ग्रामीण शांत हुए, लेकिन भविष्य में उग्र आंदोलन की चेतावनी भी दिया गया है ।
किसान संघर्ष समिति के बैनर तले नरेश मांझी, श्री धन सोम, राम स्वरूप मरकाम ,विमला मरकाम ,कमलेश प्रजापति ,तरुण मरकाम आसान सिंह मांझी, ब्रह्म देव शांडिल्य, ओशित पटेल, डिकेश यादव, छत्तर यादव सहित सैकड़ों ग्रामीण प्रदर्शन में शामिल थे।