छत्तीसगढ़ » नारायणपुर

Date : 19-Jul-2019

माड़ के झाडू की अच्छी खासी मांग, ग्रामीणों की आय का मुख्य जरिया बना

नारायणपुर, 18 जुलाई। झाडू (ब्रूम) एक घरेलू सामग्री है। जो साफ-सफाई के लिए उपयोग की जाती है। झाडू कई प्रकार की सामग्रियों से बनायी जाती है। स्थानीय स्तर पर पायी जाने वाली घास, पत्तियों और पोधे भी झाडू बनाने में उपयोग किए जाते है। आजकल कृत्रिम सींको और फाइबर के भी झाडू बाजार में बनाकर बेंचे जा रहे है। सड़क से लेकर संसद तक मोहल्ले से लेकर घरों तक हर तरफ साफ-सफाई के लिए झाडू का इस्तेमाल होता है। इसके बिना साफ-सफाई होना मुमकिन नहीं। हर व्यक्ति ने अपने जीवन में कभी न कभी झाडू सफाई के लिए इस्तेमाल अवश्य किया होगा। चाहं वह किसी भी बड़े पद पर क्यों न असीन हो।  वर्तमान समय में कई जगह मशीनी झाडू का भी उपयोग किया जाता है। लेकिन यह आम आदमी की पहुंच से दूर है। नक्सल हिंसा पीडि़त जिले नारायणपुर के विकासखंड ओरछा (अबूझमाड़) में हर तरह के वनोपज होते है लेकिन ज्यादा तादाद में फूल झाडू (घास) होता है। इसके लिए माड़ की जलवायु, वातावरण उपयुक्त है। जंगलों में मिलने वाले अन्य वनोपजों के साथ फूल झाडू भी ग्रामीणों की आय का मुख्य जरिया है। 

यहां के ग्रामीणजन घने जंगलों पहाड़ों से घिरे पहुंचविहीन इलाकों में अपने पैरों पर ही भरोसा कर कई मिलों का सफर तय कर फूल झाडू की कच्चा माल काटकर शहरों तक लाते है। पहले बिचौलियों के पास बेचने के लिए उन्हें मजबूर होना पड़ता था, जो उनके जोखिम भरे इस काम सही दाम नहीं देते थे। बनाये गए फूल झाडू की प्रदेश में अच्छी खासी मांग है।

    लेकिन अब ऐसा नहीं है, राज्य सरकार और जिला प्रशासन के कारण इन्हें बिचौलियों से मुक्ति मिल गयी है। अब झाडू के कच्चे माल की खुली खरीद नहीं होती है। इसके लिए ओरछा विकासखंड की तीन महिला स्व सहायता समूह गणेश मंडली, दुर्गा मंडली और दंतेश्वरी समूह को अधिकृत किया गया है। ये महिला समूह ही झाडू के कच्चे माल की खरीदी ग्रामीणों से करने के लिए अधिकृत है। कच्चे माल की खरीदी के लिए पास ओरछा में वन विभाग की ओर से जारी किया जाता है। उक्त महिला समूह को 5 लाख रूपऐ का चक्रिय ऋण उपलब्ध कराया गया है। 

    जिला नारायणपुर मुख्यालय की जगदम्मा स्व सहायता समूह को कच्चे माल से फूल झाडू बनाने के लिए 18 लाख रूपए का चक्रिय ऋण दिया गया है। इस कार्य से जुड़ी महिला समूहों को वन विभाग द्वारा कॉपरेटिव बैंक में संयुक्त बैंक खाता खोला गया है। जिसमें आय की राशि जमा होती है। फूल झाडू बनाने वाली महिलाओं को एक झाडू के तीन रूपए का भुगतान किया जाता है। इसके साथ ही झाडू विक्रय से प्राप्त राशि में से भी कुछ अंश का भुगतान होता है। स्व सहायता समूह की अध्यक्ष श्रीमती बुधयारिन बाई देवांगन ने बताया कि एक महिला दिन भर में 70-75 झाडू बना लेती है। अभ्यास होने पर कुछ महिला इससे अधिक झाडू भी बना लेती है। इससे उन्हें रोजाना लगभग 200 से 225 रूपए  मिल जाते है। एक हाट-बाजारों में उनके झाडू 25 से 30 रूपए में बिक जाते है। वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि यहां के झाडू पडोसी जिले के साथ ही राज्य के दूसरे जिलों राजनांदगांव, दुर्ग, रायपुर, बिलासपुर के साथ ही सरगुजा में भी विक्रय के लिए जाते है। 
 


Date : 12-Jul-2019

ब्लूरानी 19 साल से बारिश में नदी-नाला पार कर, कर रही टीकाकरण 

नारायणपुर, 12 जुलाई । राज्य सरकार जहां आदिवासियों की अच्छी स्वास्थ्य सुविधा शिक्षा और सामाजिक-आर्थिक उन्नति के लिए काम कर रही है। तो वहीं धुर नक्सल प्रभावित अबूझमाड़ क्षेत्र नारायणपुर जिले की कठिन भौगोलिक एवं विपरीत, विषम परिस्थितियों में जिला स्वास्थ्य अमले के लोग भी पीछे नहीं है। बारिश में उफनते नदी-नालों को पार कर गर्भवती महिलाओं, बच्चों को समय पर टीकाकरण कर अपने दायित्वों का बखूबी निवर्हन कर रहे है। यह बातें बताने या कहने की नहीं चित्र सब बातें बयां करते है। श्रीमती ब्लूरानी बैरागी पिछले 19 सालों से नारायणपुर और ओरछा विकासखंड के सात गांव झारावाही, हतलानार, घूमा, पीटेकल, कोडनार, अलवर (पहाड़ पर है) और कुमनार में लगभग 1100 से ज्यादा आबादी के स्वास्थ्य का ध्यान रखती है। श्रीमती बैरागी ने कुकुर नदी पार कर बच्चों को रोटा वायरस और गर्भवती महिलाओं को हतलानार पहुंचकर टीकाकरण और गर्भवती महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य की जांच की। इसके अलावा वे 6 गांव के बीच में पडऩे वाले नालों को भी पार कर बच्चों, गर्भवती महिलाओं को टीकाकरण और उनके स्वास्थ्य की जांच करती है। श्रीमती बैरागी को भारी बारिश में नदी-नाले में ज्यादा पानी होने पर गांव मेें नहीं पहुंचने का मलाल रहता है। 

श्रीमती ब्लूरानी बैरागी ने बताया कि चारों से घिरे घने-जंगलों, पहाड़ों, पथरीले और ऊबड़-खाबड़ रास्तों को पार कर आना-जाना कराना पड़ता है। बारिश के मौसम में यहां की स्थिति भयावह हो जाती है। उन्होंने बताया कि सभी मौसम में कई किलोमीटर पदैल ही सफर करना पड़ता है। बरसात में पैदल दूरी अधिक हो जाती है। लेकिन बच्चों और गर्भवती महिलाओं के समय पर खुराक और टीकाकरण करने पर हमें बहुत सुकून मिलता है। उनके चेहरे पर मुस्कान देखकर हम अपनी तकलीफ भूल जाते है। भारी बारिश के दौरान ग्रामीणों के स्वास्थ्य की जांच के लिए नहीं पहुंच पाने का दुख रहता है। कई बार नदी पार करने के बाद भारी बारिश के बीच नदी-नालों में ज्यादा पानी आ जाने के कारण दो-तीन दिनों तक वहीं नदी पार गांव में रूकना पड़ता है। लेकिन गांव वाले के प्यार और स्नेह के कारण वक्त का पता नहीं चलता । 

जिला स्वास्थ्य विभाग की रूरल हेल्थ ऑगनाइजर (आर.एच.ओ.) फीमेल नर्स श्रीमती ब्लूरानी बैरागी, और (आर.एच.ओ.) पुरूष मेल श्री अरविंद त्रिपाठी और मितानिन ट्रेनर सुश्री अश्विनी कुकुर नदी को पार कर अपने कर्तव्य स्थल तक पहुंचें। जहां उन्होंने छोटे बच्चों को रोटा वायरस की खुराक दी। साथ ही गर्भवती महिलाओं को समय पर लगाये जाने वाले टीकाकरण किया। बच्चों को विटामिन ए की भी खुराक पिलायी । 

 


Date : 12-Jul-2019

नारायणपुर परिसर में सुरक्षा बलों द्वारा वृक्षारोपण 

छत्तीसगढ़ संवाददाता
नारायणपुर, 12 जुलाई।
पुलिस अधीक्षक कार्यालय नारायणपुर एवं रक्षित केन्द्र नारायणपुर परिसर में सुरक्षा बलों द्वारा वृक्षारोपण किया गया। 

औद्योगिक युग की शुरूआत के बाद से वन तीव्र गति से काटे जा रहे है। हालांकि वृक्ष स्वाभाविक रूप से विकसित होते है लेकिन वनों की कटाई की वजह से होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए हमे अपनी ओर से योगदान देना जरूरी है। इस प्रयोजन से वृक्षारोपण किया जाता है। वृक्षारोपण की मदद् से वन तेजी से उगाए जा सकते है। इस उद्देश्य से नारायणपुर पुलिस द्वारा जिला नारायणपुर के सभी थाना-कैम्प परिसर में आने वाले दिनोंं 10 हजार फलदार व छायादार वृक्ष लगाने का लक्ष्य रखा गया है। जिसकी शुरूवार शुक्रवार को सुरक्षा बलों द्वारा पुलिस अधीक्षक कार्यालय नारायणपुर एवं रक्षित केन्द्र नारायणपुर के परिसर में बड़ी संख्या में फ लदार व छायादार वृक्ष लगाकर किया गया। पुलिस अध्ीाक्षक मोहित गर्ग, 16वी वाहिनी छसबल कमाण्डेंट जियारत बेग, कमाण्डेंट, आईटीबीपी पंकज कुमार वर्मा, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक  अनिल सोनी, डीसी, आईटीबीपी  सतीश कुमार, पुलिस अनुविभागीय अधिकारी छोटेडोंगर सुशील नायक, रक्षित निरीक्षक, रक्षित केन्द्र दीपक साव एवं प्रभारी यातायात शाखा प्रदीप जोशी एवं अन्य अधिकारी व कर्मचारीगण द्वारा वृक्षा रोपण किया गया।