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रायपुर, 14 फरवरी। कलिंगा विश्वविद्यालय ने बताया कि हिंदी फीचर फिल्म अरन्य, जो कलिंगा विश्वविद्यालय के सहयोग से निर्मित की गई है, 10 फरवरी को एन माही फिल्मस ओटीटी एप पर सफलतापूर्वक रिलीज हो चुकी है। सामाजिक सरोकारों से जुड़ी यह फिल्म दर्शकों के बीच अपनी प्रभावशाली प्रस्तुति और संवेदनशील विषय के कारण चर्चा में है।
विश्वविद्यालय ने बताया कि एन माही फिल्मस प्रोडक्शन एवं नीरा एजुकाम के बैनर तले बनी अरन्य विकास के नाम पर जंगलों के अतिक्रमण, प्रशासनिक अनुमतियों के दुरुपयोग और आदिवासी समाज के विस्थापन जैसे गंभीर मुद्दों को यथार्थ और संवेदनशीलता के साथ प्रस्तुत करती है।
फिल्म के निर्देशक नितेश झा ने बताया कि अरन्य उन जंगलों और आदिवासी समुदायों की आवाज़ है, जिनकी पीड़ा अक्सर विकास की चकाचौंध में दब जाती है। यह फिल्म दिखाती है कि प्रशासनिक शक्तियों के दुरुपयोग से किस प्रकार जल-जंगल-जमीन पर निर्भर लोगों का जीवन प्रभावित होता है। कलिंगा विश्वविद्यालय के फिल्म मेकिंग विभाग ने इस फिल्म के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। विश्वविद्यालय ने तकनीकी संसाधन, लोकेशन सपोर्ट, पोस्ट-प्रोडक्शन सुविधाएं और उद्योगोन्मुख प्रशिक्षण प्रदान कर इस परियोजना को अकादमिक और पेशेवर दोनों स्तरों पर मजबूती दी।
विश्वविद्यालय ने बताया कि छायांकन निर्देशक साहिल कुमार ने प्राकृतिक लोकेशनों पर फिल्मांकन कर जंगल की वास्तविक आत्मा को पर्दे पर जीवंत किया है। फिल्म में अनिशा मोहंती, युवराज सिंह, आलोक मिश्रा, अभिषेक शर्मा, अनमोल पांडेय, सुधांशु सिंह, नितेश झा सहित कई कलाकारों ने सशक्त अभिनय किया है। संगीत निर्देशन बबला बागची का है। ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज के साथ अरन्य केवल एक फिल्म नहीं, बल्कि समाज से संवाद का माध्यम बनकर उभरी है। यह दर्शकों को सोचने, प्रश्न करने और पर्यावरण तथा आदिवासी अधिकारों के प्रति संवेदनशील बनने का संदेश देती है।


