कारोबार
रायपुर, 28 जनवरी। व्यापारी संगठन कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के राष्ट्रीय वाइस चेयरमेन एवं राष्ट्रीय व्यापारी कल्याण बोर्ड (भारत सरकार) के सदस्य श्री अमर पारवानी, छत्तीसगढ़ इकाई के चेयरमेन श्री जितेंद्र दोशी, श्री विक्रम सिंहदेव, अध्यक्ष श्री परमानंद जैन, महामंत्री श्री सुरिन्दर सिंह, कोषाध्यक्ष श्री अजय अग्रवाल, कार्यकारी अध्यक्ष श्री राजेंद्र जग्गी, श्री राम मंधान, श्री वासु मखीजा, श्री भरत जैन, श्री राकेश ओचवानी, श्री शंकर बजाज ने संयुक्त रूप से बताया कि भारत और यूरोपीय संघ के बीच हुआ व्यापार समझौता भारत की वैश्विक आर्थिक सहभागिता में एक महत्वपूर्ण और दूरगामी कदम है।
श्री पारवानी ने बताया कि यह समझौता भारतीय व्यापारियों, एमएसएमई और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नए अवसर खोलने वाला साबित होगा। यूरोपीय संघ-जो विश्व के सबसे बड़े आर्थिक समूहों में से एक है - के साथ यह व्यापार समझौता भारतीय वस्तुओं और सेवाओं के लिए बाजार पहुंच को व्यापक बनाएगा और भारत को वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं से और अधिक मजबूती से जोड़ेगा। इससे भारतीय उत्पादों की अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता में उल्लेखनीय सुधार होगा।
श्री पारवानी ने बताया कि इस समझौते से टैरिफ और गैर-टैरिफ बाधाओं में कमी आने की संभावना है, जिससे निर्यात को प्रोत्साहन मिलेगा। साथ ही मैन्युफैक्चरिंग और सेवा क्षेत्रों में निवेश, तकनीकी सहयोग और नवाचार के नए अवसर उत्पन्न होंगे, जिसका सीधा लाभ रोजगार सृजन और औद्योगिक विकास के रूप में दिखाई देगा।
श्री पारवानी ने बताया कि यह व्यापार समझौता छोटे और मध्यम उद्यमों के लिए वैश्विक बाजारों तक पहुंच आसान बनाएगा। इससे वे केवल घरेलू बाजार तक सीमित न रहकर अंतरराष्ट्रीय व्यापार में भी सक्रिय भागीदारी कर सकेंगे। जिन क्षेत्रों को विशेष लाभ मिलेग वो निम्नानुसार है:-वस्त्र एवं परिधान, चमड़ा एवं फुटवियर, रत्न एवं आभूषण, ऑटो कंपोनेंट्स, फार्मास्यूटिकल्स, आईटी, इंजीनियरिंग वस्तुएं, डिजिटल सेवाएं, कृषि, प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद।
श्री जैन ने बताया कि भारत-ईयू व्यापार समझौता देश की आर्थिक वृद्धि, निर्यात विस्तार और मैन्युफैक्चरिंग को मजबूती देने की दिशा में एक सकारात्मक पहल है। आवश्यकता है कि व्यापारियों, विशेषकर रूस्रूश्वह्य को इस समझौते के प्रावधानों की जानकारी, प्रशिक्षण और आवश्यक सहयोग प्रदान किया जाए ताकि वे इन अवसरों का अधिकतम लाभ उठा सकें। यह व्यापार समझौता केवल बाजार विस्तार का माध्यम नहीं है, बल्कि भारतीय व्यापार को वैश्विक मंच पर मजबूत और आत्मविश्वासी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।


