बीजापुर
6.77 करोड़ के तेंदूपत्ता नुकसान में विभागीय जांच जारी
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बीजापुर, 1 जून। ईटपाल स्थित अताउर रहमान के तेंदूपत्ता गोदाम में 25 मई को हुए भीषण अग्निकांड में वन विभाग ने पहली कार्रवाई करते हुए दो वनरक्षकों के खिलाफ अनुशासनात्मक कदम उठाए हैं। हालांकि घटना के आठ दिन बाद भी नियंत्रणकर्ता अधिकारियों और गोदाम प्रभारियों पर कार्रवाई नहीं होने से स्थानीय स्तर पर सवाल उठने लगे हैं।
जानकारी के मुताबिक जिला यूनियन बीजापुर की आठ प्राथमिक वनोपज सहकारी समितियों के 13 तेंदूपत्ता लॉटों का भंडारण ईटपाल स्थित गोदाम में किया जा रहा था। 25 मई को हुई अप्रत्याशित आगजनी की घटना में लगभग 6.77 करोड़ रुपये मूल्य का तेंदूपत्ता जलकर नष्ट हो गया। विभाग द्वारा नुकसान की भरपाई के लिए बीमा कंपनी से दावा प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
वनमंडलाधिकारी बीजापुर ने प्रथम दृष्टया जिम्मेदारी तय करते हुए गोदाम सहायक सुनील बुरका (वनरक्षक) को निलंबित कर दिया है। वहीं वनरक्षक कामेश्वर एनका के निलंबन के लिए इंद्रावती टाइगर रिजर्व के उप निदेशक को प्रस्ताव भेजा गया है। इसके अलावा वनक्षेत्रपाल एवं उपवनक्षेत्रपाल स्तर के गोदाम प्रभारियों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई हेतु उच्च कार्यालय को अनुशंसा भी भेजी गई है।
विभाग का कहना है कि मामले की जांच अभी प्रगति पर है तथा जांच रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। लेकिन दूसरी ओर स्थानीय लोगों में चर्चा है कि विभाग छोटे कर्मचारियों पर कार्रवाई कर अपनी जिम्मेदारी पूरी मान रहा है, जबकि नियंत्रणकर्ता अधिकारियों व गोदाम प्रभारियों को बचाने की कोशिश की जा रही है।
लोगों का कहना है कि इतनी बड़ी घटना के तीसरे दिन ही डीएफओ को हटा दिया गया था, लेकिन आठ दिन बीत जाने के बावजूद न तो जिम्मेदार अधिकारियों पर ठोस कार्रवाई हुई है और न ही जांच के लिए गठित टीम मौके पर पहुंच सकी है।
इस बीच जिला यूनियन बीजापुर ने तेंदूपत्ता संग्राहकों को आश्वस्त किया है कि आगजनी की घटना का उनके पारिश्रमिक पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। सीजन 2026 में तेंदूपत्ता संग्रहण करने वाले सभी संग्राहकों को शासन द्वारा निर्धारित 5,500 रुपये प्रति मानक बोरा की दर से भुगतान किया जाएगा।
वर्तमान में समितियों में फड़ स्तर पर संग्रहित मात्रा की ऑनलाइन प्रविष्टि का कार्य परिवहन के साथ-साथ किया जा रहा है। विभाग के अनुसार प्रविष्टि कार्य पूर्ण होते ही राशि सीधे संग्राहकों के बैंक खातों में ऑनलाइन माध्यम से जमा कर दी जाएगी।
विभाग ने स्पष्ट किया है कि सभी संग्राहकों को उनकी मेहनत का पूरा पारिश्रमिक निर्धारित दर के अनुसार मिलेगा और भुगतान प्रक्रिया जल्द पूरी की जाएगी।


