बीजापुर

मोदी सरकार ग्राम पंचायतों की शक्तियां ठेकेदारों को सौंप रही है- सुराना
11-Jan-2026 3:21 PM
मोदी सरकार ग्राम पंचायतों की शक्तियां ठेकेदारों को सौंप रही है- सुराना

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

बीजापुर, 11 जनवरी। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के मार्गदर्शन एवं छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के निर्देश पर दंतेवाड़ा जिले के पूर्व कांग्रेस जिला अध्यक्ष एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता विमल सुराना ने शनिवार को जिला मुख्यालय बीजापुर में प्रेस वार्ता आयोजित कर कहा कि पहले मनरेगा के तहत देश भर के प्रत्येक ग्रामीण परिवार को काम की कानूनी गारंटी प्राप्त थी। देश की किसी भी ग्राम पंचायत में किसी भी परिवार द्वारा काम माँगने पर 15 दिनों के भीतर काम उपलब्ध कराना अनिवार्य था। लेकिन अब मोदी सरकार के इन बदलावों के बाद, अब यह अधिकार नहीं रहेगा, बल्कि सरकार की मर्जी से बाँटी जाने वाली एक रेवड़ी बन जाएगा और मोदी सरकार ये तय करेगी कि कौन सी ग्राम पंचायतों को काम मिलेगा और किस ग्राम पंचायत को काम नही मिलेगा।

प्रेस वार्ता के दौरान जिला कांग्रेस कमेटी बीजापुर  के अध्यक्ष लालू राठौर, शंकर कुडियम, कमलेश कारम सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता मौजूद थे।

कांग्रेस नेता विमल सुराना ने मोदी सरकार द्वारा गरीबों के मज़दूरी पाने का अधिकार छीने जाने का आरोप लगाते हुए प्रेस वार्ता में आगे कहा कि पहले मनरेगा के तहत काम तय न्यूनतम मज़दूरी पर दिया जाता था, जिसमें हर साल बढ़ोतरी की जाती थी। साल के 365 दिन काम उपलब्ध रहता था, ताकि ज़रूरत पडऩे पर परिवारों के पास कमाई का विकल्प हमेशा मौजूद रहे। लेकिन अब मोदी सरकार के इन बदलावों के तहत मज़दूरी मनमाने ढंग से तय की जाएगी, न तो न्यूनतम मज़दूरी की कोई गारंटी होगी और न ही हर साल बढ़ोतरी का कोई गारंटी। फसल कटाई के मौसम में काम की अनुमति नहीं होगी, जिससे मज़दूरों की अन्य काम देने वालों से बेहतर मज़दूरी की माँग करने की ताक़त कमज़ोर होगी और उन्हें बिना न्यूनतम मज़दूरी के जो भी काम मिलेगा उसे स्वीकार करने को मजबूर किया जाएगा।

 प्रेस वार्ता में कांग्रेस नेता सुराना ने मोदी सरकार द्वारा ग्राम पंचायत की शक्तियां ठेकेदारों को सौंपे जाने का आरोप लगाते हुए आगे कहा कि पहले मनरेगा के तहत ग्राम पंचायतों को अपने गाँव के विकास के लिए विभिन्न कार्यों में मज़दूरों को नियोजित करने का अधिकार था। विकास कार्यों की योजना और सिफ़ारिश ग्राम पंचायतों और ग्राम सभाओं द्वारा की जाती थी। ठेकेदारों पर प्रतिबंध था-मनरेगा का काम गाँव के विकास के लिए होता था। मज़दूरों को स्थानीय मनरेगा मेट्स का सहयोग मिलता था। लेकिन अब मोदी सरकार के इन बदलावों के बाद सभी फैसले दिल्ली से रिमोट कंट्रोल के ज़रिये लिए जाएंगे। विकास परियोजनाएँ कुछ सीमित श्रेणियों तक सिमट जाएँगी और योजना से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णय मोदी सरकार लेगी। ग्राम पंचायत अपना अधिकार खो देगी और केवल मोदी सरकार के आदेशों को लागू करने वाली एजेंसी बनकर रह जाएगी। ठेकेदारों को लाया जाएगा, और मज़दूरों को ठेकेदारों की परियोजनाओं के लिए लेबर सप्लाई में बदल दिया जाएगा। स्थानीय कार्यों के लिए मनरेगा मेट्स नहीं होंगे।

कांग्रेस नेता विमल सुराना ने आगे कहा कि भाजपा और मोदी सरकार राज्य सरकार को कमजोर कर रही है और राज्यों पर आर्थिक बोझ डाला जा रहा है, उन्होंने आगे कहा पहले मनरेगा के तहत मज़दूरी का 100 फीसदी भुगतान केंद्र सरकार करती थी, इसलिए राज्य सरकारें बिना किसी कठिनाई के काम उपलब्ध करा पाती थीं। लेकिन अब मोदी सरकार में राज्य सरकारों को मज़दूरी का 40त्न हिस्सा स्वयं राज्यों को वहन करना होगा। खर्च बचाने के लिए संभव है कि वे काम बिल्कुल भी न दें। कांग्रेस नेता विमल सुराना ने प्रेस वार्ता में आगे कहा कि मनरेगा पिछले 20 वर्षों से भारत के मजदूरों की जीवनरेखा रही है। मनरेगा के तहत लगभग 10 करोड़ परिसंपत्तियों का निर्माण किया गया, जिनमें गाँवों के तालाब और ग्रामीण सडक़ें शामिल हैं। कांग्रेस नेता विमल सुराना ने प्रेस वार्ता में आगे कहा कि कैग ऑडिट सहित 200 से अधिक अध्ययनों ने यह दिखाया है कि मनरेगा देश की सबसे प्रभावी और सफल योजनाओं में से एक है। इस  योजना के तहत घोषित मज़दूरी में मोदी सरकार के 11 वर्षों के दौरान मुश्किल से ही कोई बढ़ोतरी हुई है। उच्च महँगाई के बावजूद पिछले तीन वर्षों से मनरेगा के बजट में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है। मज़दूरों को भुगतान में बहुत ज्यादा देरी होती रही है। असल में, ये सब लंबे समय तक भुगतान में हुई देरी के कारण मनरेगा के वार्षिक बजट का लगभग 20 फीसदी हिस्सा पिछले वर्षों के बकाये चुकाने में ही चला जाता है। कांग्रेस नेता विमल सुराना ने कहा भाजपा और मोदी सरकार के कारण हाजिऱी और कार्यों के डिजिटल सत्यापन के लिए नेशनल मोबाइल मॉनिटरिंग सिस्टम (एनएमएमएस) ऐप लागू करने और आधार-आधारित भुगतान प्रणाली (एबीपीएस) को अनिवार्य करने से 2 करोड़ मज़दूरों से काम का अधिकार और उनकी वाजिब मज़दूरी छिन गई है।

 कांग्रेस नेता विमल सुराना ने कहा इस तरह भाजपा और मोदी सरकार ने अब काम के कानूनी अधिकार को ही समाप्त कर दिया है-जो मज़दूरों के लिए आखऱिी सुरक्षा कवच था। इसलिए ‘125 दिन’ का प्रावधान महज़ एक जुमला है। मोदी सरकार का अब तक का रिकॉर्ड साफ़ दिखाता है कि उसकी मंशा इस योजना को केवल ध्वस्त करने की ही है।

कांग्रेस नेता विमल सुराना ने मनरेगा में बदलाव करने वाले नए क़ानूनों के खतरे बताते हुए आगे कहा कि भाजपा और मोदी सरकार के इस नए क़ानून से बेरोजग़ारी में वृद्धि होगी, न्यूनतम मज़दूरी दिए बिना लोगों का श्रम के लिए शोषण होगा, शहरों की ओर मजबूरी में होने वाले पलायन में वृद्धि होगी और सबसे महत्वपूर्ण ‘पंचायतों की शक्तियाँ, अधिकार और प्रासंगिकता समाप्त हो जाएगी। ’

प्रेस वार्ता के माध्यम से कांग्रेस नेता विमल सुराना ने चार मांगें भाजपा और मोदी सरकार से की हैं जिनमें 1- काम की गारंटी, मज़दूरी की गारंटी और जवाबदेही की गारंटी देने, 2- मनरेगा में किए गए बदलावों की तत्काल वापसी, 3- काम के संवैधानिक अधिकार की पूर्ण बहाली और 4- न्यूनतम मजदूरी 400 रुपये प्रति दिन किए जाने की मांग की है।


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