बस्तर

बस्तर की जीवनरेखा बने साल के फूल
04-Jun-2026 12:44 PM
बस्तर की जीवनरेखा बने साल के फूल

बच्चों की छुट्टियों में बढ़ा परिवारों का सहारा
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
जगदलपुर, 4 जून।
बस्तर के घने जंगलों में इन दिनों साल के फूल और बीज संग्रहण का कार्य जोरों पर है। आड़ावाल के जंगलों में मालती अपने परिवार के साथ सुबह से ही साल के पेड़ों के नीचे गिरे फूल और बीज एकत्रित करने में जुट जाती हैं। यह केवल एक पारंपरिक गतिविधि नहीं, बल्कि ग्रामीण परिवारों की आजीविका का महत्वपूर्ण साधन भी है। ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ का राजकीय वृक्ष साल है। 

मालती बताती हैं कि बाजार में साल के बीज की कीमत लगभग 50 रुपये प्रति किलो मिलती है। जितना अधिक संग्रहण होगा, उतनी ही अधिक आमदनी परिवार को प्राप्त होगी। गर्मी की छुट्टियों के चलते बच्चे भी माता-पिता का हाथ बंटा रहे हैं। उनके सहयोग से कम समय में ज्यादा मात्रा में साल के फूल और बीज एकत्रित हो जाते हैं, जिससे परिवार की आय में बढ़ोतरी होती है।

 

बस्तर के वनांचल क्षेत्रों में लघु वनोपज ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ मानी जाती है। साल के फूल और बीज से होने वाली आमदनी कई परिवारों के लिए दैनिक जरूरतों को पूरा करने का प्रमुख माध्यम है। जंगलों से जुड़ी यह परंपरा आज भी आदिवासी और ग्रामीण जीवन का अभिन्न हिस्सा बनी हुई है।


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