बस्तर
प्रशासन की दखल के बाद मामला सुलझा
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
जगदलपुर, 21 मई। बस्तर संभाग के लोहंडीगुड़ा विकासखंड की ग्राम पंचायत चित्रकोट के पदरगुड़ापारा में एक मतांतरित युवक के अंतिम संस्कार को लेकर विवाद की स्थिति बन गई। गांव के सार्वजनिक मुक्तिधाम में शव दफनाने के प्रयास का ग्रामीणों और कुछ हिंदू संगठनों ने विरोध किया। मामले की सूचना मिलने पर प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के पदाधिकारी भी वहां मौजूद रहे। प्रशासन की दखल के बाद मामला सुलझा और मसीही कब्रिस्तान में अंतिम संस्कार हुआ।
माहरा समाज के चित्रकोट परगना अजय बघेल ने कहा कि मिशनरी गतिविधियों के जरिए गांवों में धर्मांतरण कराया जा रहा है। उनका आरोप था कि पंचायत स्तर पर भी इसके लिए प्रभाव बनाने की कोशिश हो रही है।
बजरंग दल के विभाग संयोजक और माहरा समाज के युवा नेता सिकंदर कश्यप ने कहा कि कुछ मिशनरी समूह हिंदू मुक्तिधामों में शव दफनाने का प्रयास करते हैं, जिससे विवाद की स्थिति बनती है। उन्होंने स्थानीय जनप्रतिनिधियों पर भी मिशनरियों का समर्थन करने का आरोप लगाया।
कुछ ग्रामीणों तथा माटी पुजारी, नाईक, सिरहा-गुनिया जैसे पारंपरिक पदों से जुड़े लोगों ने आरोप लगाया कि वर्तमान सरपंच मिशनरियों का समर्थन कर रहे हैं। पूर्व सरपंच रैतूराम कश्यप और अन्य ग्रामीणों ने कहा कि वे गांव की परंपराओं को प्रभावित नहीं होने देना चाहते।
विवाद और विरोध के बीच प्रशासन ने हस्तक्षेप किया। बाद में मृतक सुरेन्द्र कुमार बघेल के छोटे भाई पुष्पेंद्र बघेल ने लोहंडीगुड़ा तहसीलदार को लिखित आवेदन देकर शव को निकट स्थित मसीही कब्रिस्तान में दफनाने की सहमति दी। इसके बाद शव को मसीही कब्रिस्तान ले जाकर अंतिम संस्कार किया गया।


