बस्तर

लाल आतंक का अंत, ककनार घाटी के सुदूर गांवों तक पहुंची मुख्यमंत्री ग्रामीण बस सेवा
18-May-2026 3:07 PM
लाल आतंक का अंत, ककनार घाटी के सुदूर गांवों तक पहुंची मुख्यमंत्री ग्रामीण बस सेवा

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

जगदलपुर, 18  मई। बस्तर की जिन दुर्गम पहाडिय़ों, संकरी पगडंडियों और चुनौतीपूर्ण रास्तों पर कभी बारूद की गंध और लाल आतंक का खौफ हुआ करता था, आज वहाँ विकास की एक ऐसी नई इबारत लिखी गई है जिसकी कल्पना कुछ साल पहले तक नामुमकिन मानी जाती थी। बस्तर की कठिन भौगोलिक विषमताओं और माओवाद के साये को पीछे छोड़ते हुए ककनार घाटी के नीचे बसे सुदूर ग्रामीण क्षेत्र आज विकास की मुख्यधारा से पूरी तरह जुड़ चुके हैं।

कभी नक्सल आतंक का गढ़ माने जाने वाले कुधूर, धरमाबेड़ा, चंदेला, ककनार और पालम जैसे गाँवों के निवासियों के लिए पक्की सडक़ का निर्माण एक ऐसा सपना था, जिसके बारे में सोचा भी नहीं जा सकता था, क्योंकि घाटी की दुर्गम ढलान ने विकास के हर रास्ते को अवरुद्ध कर रखा था। लेकिन आज उन्हीं संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा बलों की मुस्तैदी और वामपंथी समस्या के कमजोर पडऩे से सडक़ों का जाल बिछाना संभव हो पाया है, और इन चमचमाती सडक़ों पर बस का दौडऩा बदलते बस्तर की सबसे सशक्त तस्वीर पेश कर रहा है।

 बस्तर जिले में विकास की इस रफ्तार को बढ़ाने के लिए बीते 4 अक्टूबर 2025 को केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के द्वारा ‘मुख्यमंत्री ग्रामीण बस सेवा योजना’ की शुरूआत की गई थी, जिसके तहत वर्तमान में जिले के चार चयनित मार्गों पर निरंतर बस सेवा का संचालन किया जा रहा है।

इसी योजना के अंतर्गत क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकार रायपुर द्वारा स्वीकृत समय-सारणी के अनुसार यह बस प्रतिदिन कोण्डागांव जिले के मर्दापाल से अपनी यात्रा शुरू करती है और ककनार घाटी के नीचे बसे उन गाँवों को आपस में जोड़ती है जहाँ कभी पैदल चलना भी जोखिम भरा काम था।

घाटी के इन दुर्गम अंचलों से होते हुए यह बस धरमाबेड़ा और ककनार जैसे पड़ावों को पार कर सीधे संभाग मुख्यालय जगदलपुर पहुँचती है, जिससे उन ग्रामीणों का सफर अब बेहद सुगम हो गया है जिन्होंने दशकों तक केवल सडक़ और बस का इंतजार किया था। यह निरंतर बस सेवा केवल एक वाहन नहीं है, बल्कि शासन के प्रति ग्रामीणों के विश्वास और खुशहाली की एक अटूट कड़ी बन चुकी है।

इस पक्की सडक़ और नियमित बस सेवा ने न केवल परिवहन को आसान बनाया है, बल्कि ककनार घाटी के नीचे बसे ग्रामीणों के मन से बरसों पुराने अलगाव के डर को भी हमेशा के लिए खत्म कर दिया है। अब शिक्षा, स्वास्थ्य और व्यापार जैसी बुनियादी जरूरतों के लिए ग्रामीणों को मीलों का सफर तय नहीं करना पड़ता। विकास की इस बदलती बयार को लेकर चंदेला के सरपंच तुलाराम नाग बताते हैं कि करीब दो साल पहले तक इस इलाके में माओवादी समस्या के कारण विकास पूरी तरह थम सा गया था, लेकिन आज सडक़ बन जाने के साथ ही इसे एक नई दिशा मिल चुकी है। अब इस पूरे क्षेत्र में स्कूल, आंगनबाड़ी केंद्र और स्वास्थ्य केंद्र की सेवाओं के साथ-साथ उचित मूल्य की दुकानों में खाद्यान्न एवं अन्य जरूरी सामग्रियां बेहद आसानी से सुलभ हो रही हैं, वहीं समीपस्थ ग्राम ककनार में लगने वाले साप्ताहिक बाजार की रौनक भी अब देखते ही बनती है।

 इसी तरह ककनार के सरपंच बलीराम बघेल भी अपनी खुशी साझा करते हुए कहते हैं कि पहले उन्हें अपने तहसील मुख्यालय लोहण्डीगुड़ा और जिला मुख्यालय तक जाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था, लेकिन अब इस बारहमासी सडक़ के बन जाने से आवागमन की बेहतरीन सुविधा मिल रही है। घाटी की ऊंचाइयों से उतरकर हर ग्रामीण के घर तक शासन की योजनाओं का संदेश पहुँचाने वाली यह बस सेवा इस बात का जीवंत प्रतीक है कि बस्तर का जो हिस्सा कभी अंधेरे में खोया हुआ माना जाता था, वह अब पूरी रफ्तार के साथ प्रगति की राह पर अग्रसर है।


अन्य पोस्ट