बस्तर

स्वच्छता मिशन को गति देने बस्तर के गांवों में पहुँची राज्य और यूनिसेफ की टीम
14-Feb-2026 11:28 PM
स्वच्छता मिशन को गति देने बस्तर के गांवों में पहुँची राज्य और यूनिसेफ की टीम

मॉडल ग्राम पंचायतों के निर्माण पर जोर

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

जगदलपुर, 14 फरवरी। स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के दूसरे चरण के अंतर्गत बस्तर जिले की ग्राम पंचायतों को ओडीएफ प्लस मॉडल के रूप में विकसित करने की कवायद तेज हो गई है। इसी कड़ी में 11 और 12 फरवरी को राज्य सलाहकार पुरुषोत्तम पांडा, जिला समन्वयक बस्तर, यूनिसेफ प्रतिनिधि सुधांशु पाण्डेय और संबंधित विकासखंड समन्वयकों के संयुक्त दल ने जिले के विभिन्न क्षेत्रों का सघन भ्रमण किया। इस दो दिवसीय भ्रमण का मुख्य उद्देश्य स्वच्छता गतिविधियों की जमीनी समीक्षा करना और पंचायतों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करना रहा।

 दौरे के पहले दिन टीम जगदलपुर विकासखंड की ग्राम पंचायत नगरनार पहुँची, जहां सरपंच एवं अन्य पंचायत प्रतिनिधियों और ग्रामीणों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस दौरान नगरनार को एक मॉडल ग्राम पंचायत के रूप में स्थापित करने की रणनीति पर विस्तार से चर्चा हुई। राज्य सलाहकार ने ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन को सुदृढ़ करने के निर्देश देते हुए कहा कि कचरा संग्रहण व्यवस्था को एमआरएफ से जोडऩा अनिवार्य है। बैठक में पंचायत स्तर पर ई-रिक्शा के माध्यम से कचरा संग्रहण कार्य शुरू करने और इसमें महिला समूहों को शामिल करने पर सहमति बनी। साथ ही, पंचायत की सुंदरता और स्वच्छता कार्यों के लिए एनएमडीसी के सीएसआर फंड का प्रभावी उपयोग करने की संभावनाओं को भी तलाशा गया।

  भ्रमण के दूसरे दिन टीम ने दरभा, तोकापाल और बस्तर विकासखंडों की पंचायतों का मैराथन भ्रमण किया। दरभा के कामानार में सेग्रीगेशन शेड के निरीक्षण के दौरान स्वच्छताग्राही दीदियों के कार्यों की सराहना की गई और उन्हें 15वें वित्त आयोग से समय पर भुगतान व सेफ्टी किट उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए।

यहाँ आयोजित वजन तिहार कार्यक्रम में टीम ने कुपोषण और स्वच्छता के अंतर्संबंधों पर ग्रामीणों से संवाद किया। इसी क्रम में तोकापाल के सिंगनपुर में सामुदायिक स्वच्छता परिसरों को शादी-विवाह जैसे सार्वजनिक आयोजनों हेतु उपयोग शुल्क निर्धारित कर संचालित करने का नवाचारी सुझाव दिया गया, ताकि पंचायत की आय में वृद्धि हो सके।

निरीक्षण की इस कड़ी में धरमाउर स्थित वाटर ट्रीटमेंट प्लांट और सोनारपाल के फीकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट की कार्यप्रणाली को भी परखा गया। टीम ने इन संयंत्रों को क्लीन एंड ग्रीन मानकों के अनुरूप चलाने और इनकी नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। स्कूलों और आंगनबाडिय़ों में गंदे जल के प्रबंधन हेतु सोख्ता गड्ढों और नाडेप निर्माण पर विशेष जोर दिया गया ताकि शिक्षण संस्थान स्वच्छता के केंद्र बन सकें। अंत में जिला पंचायत में विभागीय अधिकारियों के साथ बैठक में फील्ड विजिट के निष्कर्षों को साझा करते हुए जिले की स्वच्छता रैंकिंग में सुधार लाने हेतु आगामी कार्ययोजना तैयार की गई।


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