बलौदा बाजार

जमीन पर अवैध कब्जे से परेशान बुजुर्ग ने दी आत्मदाह की चेतावनी
08-May-2026 3:58 PM
जमीन पर अवैध कब्जे से परेशान  बुजुर्ग ने दी आत्मदाह की चेतावनी

 हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी नहीं मिल रहा कब्जा...

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

बलौदाबाजार, 8 मई। एक तरफ प्रदेशभर में सुशासन तिहार के माध्यम से सरकार आम जनता को त्वरित न्याय, समर्थन और समस्याओं के समाधान का भरोसा दिला रही है। गांव-गांव में कैंपिंग प्लांट जा रहे हैं इसलिए कोई भी समस्या नहीं बनी रह रही है।

वहीं दूसरी ओर राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा के गृह जिले बलौदाबाजार की तस्वीर सामने आई है जहां इन व्यापारियों पर गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं। यहां ग्राम अर्जुनी में स्थित जमीन पर कब्जे से परेशान बुजुर्ग मोहितराम वर्मा पिछले करीब 15 साल से अपनी पुश्तैनी जमीन पर अधिकार पाने के लिए दर-दर भटक रहे हैं। उच्च न्यायालय से उनके पक्ष में आदेश आने के बावजूद आज तक उन्हें जमीन पर कब्जा नहीं मिला। स्थिति इतनी गंभीर है कि पीडि़त ने जिला प्रशासन को आवेदन देकर स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही कोई कार्रवाई नहीं हुई, तो वह 25 मई को अनिश्चितकालीन धरने पर बैठेंगे और आत्मदाह के रूप में कठोर कदम उठाएंगे।

बलौदाबाजार जिले के ग्राम अर्जुनी में स्थित खसरा नंबर 183, 825/1 एवं 825/4, कुल रकबा 1.203 हेक्टेयर भूमि को लेकर वर्षों से विवाद चल रहा है। मोहितराम वर्मा का कहना है कि यह उनकी पुश्तैनी जमीन है, जिस पर प्रतिवादियों ने कब्जा कर लिया है।

वकील कोर्ट से सिविल कोर्ट, जिला कोर्ट और अंतत: छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट बिलासपुर तक मुकदमा शुरू हुआ। रिकार्ड, गवाहों और सीमा निर्धारण रिपोर्ट के आधार पर न्यायालय ने मोहितराम वर्मा के पक्ष में निर्णय दिया। उच्च न्यायालय ने भी मजिस्ट्रेट अदालत के फैसले को सही ठहराते हुए स्पष्ट किया कि भूमि पर वास्तविक अधिकार मोहित राम वर्मा का है और सब्सिडी वैधानिक कब्जे वाले कारीगरों को दिया जाना चाहिए। उच्च न्यायालय के आदेश के सीमांकन के दौरान यह भी पाया गया कि प्रतिवादियों ने बुजुर्ग मोहित राम वर्मा की भूमि पर कब्जा कर लिया है। इसके बावजूद आज तक ऑर्डर का पालन नहीं हुआ।

पीडि़त का आरोप है कि उच्च न्यायालय के आदेश की प्रति के साथ वह लगातार राजस्व है विभाग के अधिकारियों के साथ आवेदन कर रहा है। फिर भी इसके ठेठ और लचीले लोगों के दबाव के कारण उसे न्याय नहीं मिल रहा। पिछले 15 वर्षों से वह तहसील, अनुविभागीय अधिकारी, रजिस्ट्रार कार्यालय, न्यायालय और राजस्व विभाग के चक्कर काट रहा है, लेकिन हर बार केवल अनुशासन ही मिला।

मोहितराम वर्मा का कहना है, न्यायालय चयन बैठक के बाद भी अगर जमीन नहीं मिली, तो आम आदमी खत्म हो जाए तो कहां जाए? मैंने अपनी पूरी जिंदगी इस लड़ाई में लगा दी, लेकिन आज भी न्याय अधूरा है। 7 मई 2025 को जिला कलेक्टरों को दिए गए अवलोकन में उन्होंने पूरे मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्षों से न्याय की उम्मीद में सरकारी राक्षसों के चक्कर-लगाते वह थक गए हैं। लगातार मानसिक, आर्थिक और सामाजिक प्रताडऩा सहते-झेलते अब वह टूट गए हैं और अगर अब भी कार्रवाई नहीं हुई तो भूख हड़ताल और आत्मदाह के अलावा उनके पास कोई रास्ता नहीं बचेगा।


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