बलौदा बाजार
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बलौदाबाजार, 3 मार्च। होली के नजदीक आते ही शहर के बाजारों में रंग, गुलाल और पिचकारियों की बिक्री बढ़ गई है। मुख्य बाजार, पुराना बस स्टैंड क्षेत्र और अन्य व्यावसायिक इलाकों में सुबह से ग्राहकों की आवाजाही देखी जा रही है।
दुकानों में विभिन्न प्रकार की पिचकारियां उपलब्ध हैं। बच्चों के लिए कार्टून थीम, टैंक और गन आकार की पिचकारियां रखी गई हैं। कुछ दुकानदार ग्राहकों को पिचकारी दिखाने के लिए पानी की टंकियों के साथ डेमो भी दे रहे हैं। युवाओं के लिए रंगीन टोपी, चश्मे और मुखौटे भी बिक्री के लिए उपलब्ध हैं।
दुकानदारों के अनुसार इस बार हर्बल गुलाल की मांग बढ़ी है। रासायनिक रंगों के बजाय फूलों से बने और ‘स्किन फ्रेंडली’ बताए जा रहे रंगों को ग्राहक प्राथमिकता दे रहे हैं। छोटे पैकेट से लेकर बड़े पैक तक विभिन्न विकल्प बाजार में उपलब्ध हैं।
दुकानदार दीपक नंदवानी ने बताया कि ग्राहक विशेष रूप से बच्चों के लिए हर्बल रंग खरीद रहे हैं।
महिलाओं द्वारा रंगीन चुनरियां, पूजा सामग्री और सजावटी सामान की खरीदारी की जा रही है। कुछ दुकानों पर होली गिफ्ट पैक भी उपलब्ध हैं, जिनमें गुलाल और अन्य सामग्री शामिल है।
व्यापारियों का कहना है कि उन्हें इस बार बिक्री बेहतर रहने की उम्मीद है। उनका कहना है कि त्योहार के दौरान लोग बाजार आकर सामान देखना और खरीदना पसंद करते हैं।
मिठाई और नमकीन की दुकानों में भी ग्राहकों की संख्या बढ़ी है। गुझिया और अन्य पारंपरिक पकवानों की तैयारी की जा रही है। कुछ दुकानों में अग्रिम बुकिंग भी शुरू हो चुकी है। हलवाईयों के अनुसार होली से एक-दो दिन पहले बिक्री और बढ़ती है। त्योहार को देखते हुए बाजार क्षेत्रों में पुलिस गश्त बढ़ाई गई है। प्रशासन ने लोगों से सुरक्षित और सौहार्दपूर्ण तरीके से होली मनाने की अपील की है तथा हानिकारक रंगों के उपयोग से बचने की सलाह दी है।
हर्बल गुलाल अपनाएं जिलेवासी - कलेक्टर
दंतेवाड़ा 3 मार्च। दंतेवाड़ा में दंतेश्वरी महिला स्व सहायता समूह द्वारा निर्मित हर्बल गुलाल की मांग में इजाफा हआ है। होली पर्व के दौरान यह उत्पाद तेजी से लोकप्रिय हुआ है। कलेक्टर देवेश कुमार ध्रुव ने इस पहल को सराहनीय बताते हुए कहा कि इससे महिलाओं को आय का साधन मिला है और त्योहारों को पर्यावरण-अनुकूल बनाने की दिशा में सकारात्मक कदम बढ़ा है। जिला पंचायत के सीईओ ने इसे ‘वोकल फॉर लोकल’ की भावना को साकार करने वाला प्रयास बताया।
ग्रामीण महिलाओं द्वारा तैयार यह हर्बल गुलाल उचित कीमत पर उपलब्ध है, जिससे हर वर्ग के लोग इसे खरीद सकते हैं। सुरक्षित रंगों के उपयोग से त्वचा रोग, एलर्जी और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं से बचाव संभव है। यह पहल स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण और महिला सशक्तिकरण, तीनों को एक साथ जोड़ते हुए स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान कर रही है।


